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दरिद्र भगाने के लिए फैजाबाद और गोंडा से आया गन्ना

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प्रतापगढ़। प्रबोधिनी एकादशी पर इस बार बेल्हा की महिलाएं कोयंबटूर प्रजाति के गन्ने से घर में पैर जमाए दरिद्र को खदेड़ेंगी। बाजारों में हरे गांठ वाले गन्ने के मुकाबले इस गन्ने की खूब डिमांड है। पर्व को लेकर फैजाबाद व गोंडा से बेल्हा के बाजारों में इस प्रजाति के गन्ने की बड़ी खेप आई है। शहर से लेकर गांव तक पूजन अर्चन की समाग्रियों की साथ ही गन्ने की भी जमकर खरीदारी की जा रही है।
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दीपावली के बाद प्रबोधिनी एकादशी का विशेष आध्यात्मिक महात्म्य है। यह दिन पूजन-अर्चन के लिए विशेष माना जाता है। बताया जाता है कि भगवान चार माह शयन के बाद इस दिन जगते हैं। इसके अलावा भी कई आध्यात्मिक क थाओं के साथ कुछ परंपराएं भी जुड़ी हुई हैं। इन्हीं परंपराओं में से एक है, दरिद्र खेदने की परंपरा। महिलाएं पुराने सूप को गन्ने से पिटती हैं। ऐसे में पर्व को लेकर गन्ने की जमकर खरीदारी होती है। अब तक पर्व पर जिले के ही गन्नों से बाजार सजते थे। रानीगंज, पट्टी, लालगंज, कुंडा के अलावा सदर में भी गन्ना पैदा होता था। बाजारों में अधिकांश हरे गाठ वाले गन्ने दिखते थे। मगर अधिक लागत व संसाधन के अभाव के चलते धीरे-धीरे जिले में गन्ना से किसानों का मोहभंग हो गया। अब महज नाममात्र के गन्ना किसान हैं। ऐसे में प्रबोधिनी एकादशी पर जिले में डिमांड को देखते हुए गोंडा व फैजाबाद से गन्ने की खेप आई है। यह कोयंबटूर प्रजाति का लाल गांठ वाला गन्ना है। सोमवार को सुबह से ही शहर के भंगवाचुंगी, बाबागंज, सदर बाजार, घंटाघर, पंजाबी मार्केट, राजापाल टंकी, अंबेडकर चौराहा, स्टेशन, कचेहरी रोड, बलीपुर सहित शहर के सभी छोटे-बड़े चौराहों व बाजारों में गन्ना स्टाल लग गए थे। यहां खरीदारी के लिए भीड़ लगी रही।

एकादशी व्रत की तैयारी को लेकर एक दिन पूर्व सोमवार को बाजारों में लोगों की भारी भीड़ रही। फलाहार में सूरन, शकरकंद, सिंघाड़े की खूब बिक्री हुई। शहर के पल्टन बाजार, बाबागंज, अंबेडकचौराहे स्थित सब्जी मंडी में दुकानें शकरकंद, सूरन व सिंघाड़े से सजी रही। इनकी जमकर खरीदारी हुई। प्रबोधिनी एक ादशी के दिन सिद्धि प्राप्ति के लिए बहुत ही उपर्युक्त माना जाता है। इस दिन पूजन अर्चन को लेकर तांत्रिक से लेकर मझे साधकों को बड़ी सिद्दत से इंतजार रहता है। पूजन- अर्चन के लिए आचार्य आलोक मिश्र व पंडित प्रभाकर नाथ पांडेय ने बताया कि दोपहर 3:11 तक भद्रा है। इसके बाद पूजन अर्चन का मुहूर्त शुरू हो जाता है। उन्होंने बताया कि शाम 4:29 से 6:08 तक स्थिर लग्र है। इसके बाद 8:08 से 10:22 तक स्थिर लग्र है, जिसमें साधक पूजन अर्चन कर विशेष लाभ प्राप्त कर सकते है। इसके अलावा 13:36 से 2:50 तक स्थिर लग्र है। उन्होंने बताया कि यह लग्र तंत्र साधना के लिए उपर्युक्त है।उन्होंने बताया कि इस दिन तुलसी मां की विशेष पूजन हेाती है। घर-घर मां तुलसी की पूजन होगी।
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