प्रतापगढ़। यूपी बोर्ड के परीक्षा केंद्रों की सूची में इस बार भी जिले के राजकीय विद्यालयों को तरजीह नहीं मिली। बोर्ड के मानक पर राजकीय विद्यालय खरे नहीं उतर सके। जिले के 41 राजकीय विद्यालयों में से महज 7 को ही परीक्षा केंद्र बनाया गया है। पिछली बार की तरह ही इस बार भी वित्तविहीन विद्यालयों को तरजीह दी गई है।
यूपी बोर्ड की परीक्षा में राजकीय व सहायता प्राप्त विद्यालयों को प्राथमिकता देने का निर्देश है। शासन का निर्देश है कि राजकीय व सहायता प्राप्त विद्यालयोें को केंद्र की सूची में वरीयता दी जाए। इसके लिए राजकीय व सहायता प्राप्त विद्यालयों को सुविधाओें से लैस किया जा रहा है। सीसीटीवी कैमरा, लैब, छात्र-छात्राओं के बैठने की व्यवस्था सुदृढ़ हो चुकी है। बोर्ड परीक्षा के लिए केंद्र बनाए जाने को लेकर इन विद्यालयों ने संबंधी आधारभूत सूचनाएं भी दीं, मगर सारी प्रक्रियाओं के बाद भी केंद्र की सूची से बाहर रहे। बोर्ड द्वारा जारी 197 परीक्षा केंद्रों की सूची में 41 राजकीय विद्यालयों के सापेक्ष महज 7 को केंद्र बनाया गया है। 78 सहायता प्राप्त विद्यालयों में 68 केंद्र बने हैं। इसी तरह 622 वित्तविहीन में से 122 वित्तविहीन विद्यालयों को केंद्र बनाया गया है। यही हाल पिछले शिक्षासत्र में भी रहा। 210 परीक्षा केंद्रों में 4 राजकीय, 68 सहायता प्राप्त व 138 वित्तविहीन विद्यालयों को परीक्षा केेंद्र बनाया गया था। डीआईओएस डा. एसके सिंह ने बताया कि तीन जीआईसी कालेज डिबार घोषित किए गए हैं। परीक्षा केंद्रों की सूची में राजकीय विद्यालयों की संख्या कम है। केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया बोर्ड द्वारा की जाती है।
सामूहिक नकल की मिली थी शिकायत, फिर भी बनाए गए केंद्र
मांधाता, कुंडा व सांगीपुर क्षेत्र में स्थित कई विद्यालयों में नकल की शिकायत मिली थी। डीआईओएस ने उनके खिलाफ कार्रवाई भी की थी। मगर इसके बाद भी उन्हें परीक्षा केंद्र की सूची में शामिल किया गया है।
वित्तविहीन मानक पर रखे, राजकीय नहीं
बोर्ड द्वारा जारी सूची में वित्तविहीन विद्यालयों को केंद्र की सूची में शामिल किया गया है। इन विद्यालयों में कई ऐसे भी विद्यालय हैं जो मानक पर खरे नहीं हैं, मगर इन्हें परीक्षा केंद्र बनाया गया है। मगर राजकीय विद्यालय खरे नहीं हैं।