बस अड्डे पर प्रयागराज जाने वाली बस पर बैठने को मशक्कत करते यात्री।
- फोटो : प्रतापगढ़
परिवहन निगम की 40 बसों को चुनाव में लगा दिया गया है। इससे विभाग के पास महज 44 बसें बची हैं। इनमें दस बसें खटारा हैं तो सात बसें सड़क पर चलने लायक नहीं हैं। इससे यात्रियों की मुसीबत बढ़ गई है।
प्रयागराज, लखनऊ के साथ ही जिले में आने-जाने के लिए भी लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। 17 से 23 अप्रैल तक प्रतापगढ़ से होकर गुजरने वाली ट्रेनों के निरस्त होने के बाद परेशानी और बढ़ेगी।
प्रतापगढ़ डिपो में अनुबंधित बसों को मिलाकर कुल 84 बसें हैं। शासन के आदेश पर एआरएम ने 40 बसों को लोकसभा चुनाव संपन्न कराने के लिए भेज दिया। ऐसे में प्रतापगढ़ डिपो के पास महज 44 बसे बची हुई हैं। विभागीय सूत्रों की मानी जाए तो ज्यादातर बसें पुरानी हैं। 17 बसें खटारा हो गई हैं। सात बसें सड़क पर चलने लायक ही नहीं हैं।
जबकि दस बसों को जुगाड़ से चलाया जा रहा है। इससे विभागीय अफसर भी परेशान हैं। प्रतापगढ़ डिपो में महज 37 बसें बची हैं। इनमें से एक बस को लखनऊ तो एक को कानपुर और दो बसों को दिल्ली के लिए संचालित किया जा रहा है। फैजाबाद, पट्टी, बनारस के लिए एक-एक बसों का संचालन हो रहा है। इससे यात्रियों को काफी परेशान होना पड़ रहा है।
बसों का घंटों डिपो में इंतजार करना पड़ रहा है। बस मिलती भी है तो बैठने के लिए जगह नहीं मिल पाती है। इससे यात्री परेशान हो रहे हैं। इसका फायदा प्राइवेट बस मालिक उठा रहे हैं।