बात 35 साल पहले की है, जब मतदाता इतने जागरूक नहीं होते थे। फिर भी उनमें मत डालने को लेकर जुनून था। मतदान के दिन अपना काम-काज छोड़कर वोट देने के लिए निकल पड़ते थे। बूथ दूर होने के कारण वह सारा काम छोड़कर सुबह ही चल देते थे। मत डालने को लेकर उनमें खास उत्साह देखने को मिलता था। 1984 के चुनाव में जिले के 52.85 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने अधिकार का प्रयोग करके प्रत्याशियों को चौका दिया था।
लोकसभा चुनाव में मतदान की तैयारी से अधिक मतदाता जागरूकता पर जोर दिया जा रहा है। जिला प्रशासन ने शहर से गांव तक मतदाताओं को जागरूक करने के लिए अफसरों को जिम्मेदारी सौंप रखी है। बच्चे गांव की गलियों में घूम-घूमकर लोगों से मतदान करने का आह्वान कर रहे हैं। यह ऐसे समय में हो रहा है, जब जिले में 90 प्रतिशत पुरुष और 80 प्रतिशत महिलाएं साक्षर हैं। वर्ष 1984 में हुए लोकसभा चुनाव में जिले के 7,51,774 मतदाताओं में 3,97,312 महिलाओं और पुरुषों ने मतदान में हिस्सा लेकर मतदान प्रतिशत 52.85 प्रतिशत पहुंचाया था।
इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी राजा दिनेश सिंह को भारी जीत मिली थी। उन्हें 2,79,354 मत मिले थे। अगर मत प्रतिशत पर गौर करें तो वह 71.632 प्रतिशत था। जबकि दूसरे स्थान पर एलकेडी के प्रत्याशी रामदेव को महज 46,847 मतों से संतोष करना पड़ा था। मगर इसके बाद से मतदान के प्रतिशत में लगातार गिरावट आती गई। वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में मात्र 52.12 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने अधिकार का प्रयोग किया था।
मतदाताओं में मत डालने को लेकर इतनी अरुचि क्यों पैदा हो रही है, यह चिंताजनक है। फिलहाल यह प्रयास किया जा रहा है कि अधिकाधिक मतदाताओं को जागरूक किया जाए और वह चुनाव के दिन बूथ तक पहुंचकर अपने अधिकार का प्रयोग करें।
शत्रोहन वैश्य,एडीएम।