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अपराजिता : 100 मिलियन स्माइल’ का प्रतापगढ़ में पोस्टर लांच, नारी गरिमा के साझा संकल्प का आगाज

Fri, 30 Nov 2018 11:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़।
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नारी गरिमा के साझा संकल्प ‘अपराजिता : 100 मिलियन स्माइल’ के पोस्टर की लांचिंग प्रतापगढ़ में शुक्रवार को बतौर मुख्य अतिथि जिलाधिकारी की पत्नी डॉ. स्निग्धा रश्मि समेत शहर की अलग-अलग क्षेत्रों की प्रतिष्ठित महिलाओं ने की। इसमें चिकित्सा, शिक्षा, समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाली महिलाओं ने बेटियों-बहनों को सशक्त बनाने के अमर उजाला के अभियान की सराहना की। कहा कि इस मुहिम के जरिए महिलाओं को बड़ी ताकत मिल सकेगी। साथ ही समाज के हर तबके की महिलाओं से एक साथ जुड़कर इस अभियान को गति देने की अपील की।
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डीएम के कैंप कार्यालय स्थित सभागार में अपराह्न तीन बजे ‘अपराजिता : 100 मिलियन स्माइल’ के पोस्टर की लाचिंग हुई। इसी के साथ इस मुहिम का जोरदार आगाज हुआ। आह्वान किया गया कि महिलाओं को सबसे पहले इस मुहिम के जरिए शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से सबल बनाने की दिशा मे ंप्रयास किया जाए। नारी जब आत्मनिर्भर होगी, तभी वह सशक्त होगी। जब नारी सक्षम और समर्थ होगी तब आधी आबादी के बीच छाया अंधेरा छंट सकेगा। इसके लिए ‘अपराजिता’ बड़ा प्लेटफार्म साबित हो सकेगा।

साथ ही इस दौर की महिलाओं को संस्कार अपनाने और सजग रहने के लिए सुझाव दिए गए, ताकि वह खुद बेझिझक होकर सम्मान के साथ अपने सुहावने भविष्य की बुनियाद रख सकें। सबने माना कि साझा संघर्ष से दूर होगा पिछड़ी सोच का अंधेरा। घर से करनी होगी नारी सशक्तिकरण की शुरुआत।
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शहर की प्रतिष्ठित महिलाओं की राय
महिलाएं पराजित नहीं हो सकती हैं। अपने जीवन में मैजिक पैदा करना होगा। रास्ता बनाना है तो सपोर्ट मिलता है। शिक्षित होने से ज्यादा शिक्षा का सही प्रयोग करना जरूरी है। महिलाएं अगर पढ़ती हैं तो उनकी शिक्षा का सही प्रयोग होना चाहिए। हमें महिला सशक्तिकरण का मतलब समझना होगा।
डा. स्निग्धा रश्मि,

महिला सशक्त तभी हो सकती है जब वह स्वावलंबी होगी और स्वावलंबी होने के लिए शिक्षित होने के साथ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता भी जरूरी है। प्रतापगढ़ में इन दोनों चीजों की कमी है। हमें इस ओर गंभीरता से विचार करना होगा।
प्रेमलता सिंह, अध्यक्ष, नगर पालिका

महिलाओं के पिछड़ने का सबसे बड़ा कारण भेदभाव है। हम भले ही महिला सशक्तिकरण की बात कर रहे हैं, लेकिन समाज में अभी भी बेटे-बेटियों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। यही कारण है कि बेटियां खुद को घर में ही असुरक्षित महसूस कर रही हैं। सबसे पहले हमें यह भेदभाव खत्म करना होगा।
स्मृति सिंह, प्रिंसिपल, संस्कार ग्लोबल स्कूल

महिलाओं के आत्मसम्मान की रक्षा के साथ उन्हें सशक्त बनाने में अमर उजाला का यह अभियान मील का पत्थर साबित होगा। ‘अपराजिता’ के तले चरणबद्ध तरीके से सजगता, बेहतरी, आत्मनिर्भरता, साहस और संस्कार के बीज बोए जाने चाहिए। हम हर चीज के लिए सरकार और प्रशासन का मुंह नहीं देख सकते।
सविता यादव, अपर जिला सूचना अधिकारी

महिलाओं को कानून की जानकारी होनी चाहिए। उन्हें निर्णय लेने की आजादी मिलनी चाहिए। जब उन्हें फैसले करने की आजादी मिलेगी तो वह सशक्त होंगी। उन्हें न सिर्फ अपने बल्कि परिवार के मामलों में भी निर्णय लेने की छूट देनी होगी।
पुष्पांजलि शुक्ला, निदेशक, यूनिक मोटर्स

हमें न सिर्फ महिलाओं को साक्षर करना होगा बल्कि उन्हें हर स्थिति का सामना करने लायक बनाना होगा। आसपास के लोगों को जागरूक करना होगा। लड़कियां नहीं चाहिए, यह भाव बदलना होगा।
शशि शर्मा, सदस्य, लायंस क्लब गौरव

महिलाओं को असुरक्षा की भावना से बाहर निकलना होगा। उन्हें खुद के भीतर का डर खत्म करना होगा। खुद को सबल बनाने के लिए अपने ज्ञान और विवेक का इस्तेमाल करना होगा। जड़ता को खत्म करना होगा।
डा. श्रद्धा सिंह, सदस्य, महिला सहायता प्रकोष्ठ

प्रतापगढ़ में प्रति एक हजार पुरुषों पर 994 महिलाएं हैं, लेकिन हर क्षेत्र में उनकी सहभागिता कम है। आखिर ऐसा क्यों है। जनसंख्या बल में लगभग बराबर होने के बावजूद महिलाएं हर क्षेत्र में क्यों पिछड़ी हुई हैं। इस पर गंभीरता के साथ विचार करना होगा।
श्रद्धा पांडेय, तहसीलदार, सदर।

महिलाएं शोषण के लिए खुद ही जिम्मेदार हैं। महिलाएं शोषित तब होती हैं जब वह शोषण के लिए तैयार होती हैं। महिलाएं अपने को जेंडर के रूप में प्रस्तुत न करें। इससे खुद को अलग करें। हमें अपनी कार्यक्षमता के बल पर अपनी पहचान बनानी होगी।
डा. शिवानी मातनहेलिया, संगीतज्ञ और यशभारती से पुरस्कृत

महिलाएं घर-परिवार संभालने के बाद भी अपने कार्यक्षेत्र में सौ प्रतिशत देना चाहती हैं, लेकिन उन्हें सपोर्ट नहीं मिलता। एक महिला को हमेशा दूसरी महिला का सपोर्ट करना चाहिए। हौसला बुलंद होना चाहिए। संघर्ष करते हुए ही आगे बढ़ा जा सकता है।
डा. सीमा खंडेलवाल, डेंटिस्ट

महिलाओं को न सिर्फ शिक्षित करने की बल्कि उनके भीतर संस्कार भी विकसित करने की जरूरत है। स्कूलों और घर में नैतिक शिक्षा देनी होगी। जिससे वह सही और गलत का अंतर समझ सकें।
नमिता पांडेय, सदस्य, बाल कल्याण समिति।

महिलाएं अपने साथ होने वाली घटनाओं को छिपाती हैं। उनका समझौता ही उनके शोषण का कारण है। उन्हें अपना आत्म सम्मान जगाना होगा। गलत कार्यों का हर मोड़ पर विरोध करना होगा।
लक्ष्मी मिश्रा, टीचर

हमें लड़का-लड़की का भेदभाव खत्म करना होगा। घर में बेटी पैदा होने के बाद ही माता-पिता को उसकी शादी और दहेज की चिंता सताने लगती है। आदमी बेटी के पैदा होने के साथ ही तनाव में हो जाता है। इस सोच को बदलना होगा।
डा. कामायनी उपाध्याय, स्त्री रोग विशेषज्ञ।

सशक्तिकरण के लिए महिलाओं की एक टीम बनानी होगी। उन्हें एक प्लेटफार्म देना होगा, जहां वह अपनी बात खुलकर रख सकें। उनकी समस्या का समाधान करना होगा। तभी वह मजबूत बन सकेंगी।
अनामिका उपाध्याय, समाजसेवी

आजादी दो, सपोर्ट दो। महिलाओं को अपना कैरिअर चुनने की आजादी मिलनी चाहिए। वह खुद अपने बारे में फैसला करें। सही-गलत का अंतर समझें। तभी वह सशक्त बन सकेंगी।
अनुभा पांडेय, प्रिंसिपल, स्प्रिंग डेल एकेडमी

लड़कियों में कांफिडेंस नहीं है। कालेज आते-जाते समय कई बार उन्हें अप्रिय घटनाओं का सामना करना पड़ता है। लड़के घूर रहे होते हैं। इन चीजों को रोकने के लिए महिलाओं को भी आगे आना चाहिए। महिलाएं जहां भी ऐसा देखें वह लड़कों को सलीके से समझाएं।
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बबिता सिंह, सीओ सदर
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