बेनामी संपत्ति के मामले में बेल्हा भी कमतर नहीं है। काली कमाई के कुबेरों ने जिले के साथ दूसरे जनपदों और शहरों में बड़ा आर्थिक साम्राज्य खड़ा कर रखा है। आयकर विभाग की नजरों से बचने के लिए कुछ ने परिवार के सदस्य-रिश्तेदार तो कुछ ने करीबी लोगों को इसका मालिक बनाया है। आयकर विभाग के पूर्व अधिकारी और आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों की राय के मुताबिक जिले में 25 अरब से ज्यादा की बेनामी संपत्ति है। आयकर विभाग भी इस काले कारनामे से परिचित है, लेकिन कभी उसने कार्रवाई के लिए प्रयास तक नहीं किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने 30 दिसंबर के बाद बेनामी संपत्तियों का साम्राज्य खड़ा करने वालों पर कार्रवाई का एलान किया है। उनकी इस घोषणा से जनपद के साथ ही दूसरे जनपद व प्रांतों में बेनामी संपत्ति का साम्राज्य खड़ा करने वालों के हाथ-पांव फूलने लगे हैं। वे सरकार के कदम उठाने से पहले अपने काले साम्राज्य का बंदोबस्त करने में जुट गए हैं। जनपद में भी करीब 25 अरब से अधिक की बेनामी संपत्ति बड़े लोगों के पास है। इसमे सफेदपोश नेताओं के साथ ही बड़े व्यापारी, अफसर, पुलिसकर्मी, राजस्व विभाग के कर्मचारी से लेकर शिक्षा देने वाले गुरुजन भी शामिल हैं। किसी ने सरकारी नौकरी में रहते हुए करोड़ों का साम्राज्य खड़ा रखा है तो कोई भूमाफिया से गठजोड़ कर लखपति से करोड़पति बन गया है। कई लोग तो ऐसे हैं जिनके पास नाममात्र की संपत्ति है, लेकिन उन्होंने करीबियों नाम से बेशुमार जमीन, जेवरात के साथ मकान व प्लाट लेखा है। उनके अपनों के नाम से होटल, दुकान व मार्केट भी चल रहा है।
खास बात है कि ऐसे लोगों की जानकारी आयकर विभाग को भी है, लेकिन ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाया गया। यदि पीएम ने बेनामी संपत्ति वालों के खिलाफ कदम उठाया तो बड़े-बड़े लोग कंगाल हो जाएंगे। पूर्व जिला आयकर अधिकारी केएस सिंह भी मानते हैं कि जनपद में बेनामी संपत्ति वालों की संख्या हजारों में हैं। उनका कहना है कि बेनामी संपत्ति का साम्राज्य 25 अरब से अधिक का ही होगा। जनपद के अलावा भी लोगों ने देश के दूसरे प्रदेश में भरोसेमंद लोगों के नाम से संपत्ति खरीद रखी है।
हादसों के बाद होती है असलियत की जानकारी
शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक में बेनामी संपत्ति का साम्राज्य लोगों ने खड़ा कर रखा है। आलीशान मकान हो या व्यवसायिक संस्थान। दिखावे के लिए मालिक भले ही कोई हो लेकिन हकीकत में उसका स्वामी कोई दूसरा ही होता है। इस बात की जानकारी लोगों को हादसों के बाद ही होती है। महेशगंज थाना क्षेत्र में अवैध शराब की फैक्ट्री बरामद हुई। जांच के बाद पता चला था कि फैक्ट्री मजदूर के नाम से है।