ग्राम पंचायतों की सूचना देने में बीडीओ कितनी लापरवाही बरत रहे हैं, इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। गौरा बीडीओ ने जनसूचना अधिकार के तहत सूचना देने के लिए आवेदक से 1920 रुपये जमा कराया और चार पेज में सूचना थमा दी। इससे पीड़ित आवेदक ने पूरे मामले की जांच कराने के लिए डीपीआरओ से शिकायत की है।
गौरा विकास खंड के बेहदौलकला निवासी प्रभाकर प्रसाद मिश्र ने ग्राम पंचायत में हुए विकास कार्यो की सूचना बीडीओ से जनसूचना के अधिकार के तहत मांगी थी। बीडीओ ने 960 पेज में समाहित सूचना देने के लिए 1920 रुपये खाते में जमा करने को कहा। 29 मई 2018 को पीड़ित ने बैंक में रुपये जमा कर ब्लाक में रसीद भी मुहैया करा दी। मगर बीडीओ ने उन्हें चार पेज की आधी-अधूरी बगैर प्रमाणित सूचना दे दी। प्रभाकर प्रसाद मिश्र ने बताया कि डीपीआरओ से मिलकर पूरे मामले की शिकायत की गई है, मगर अभी तक न तो सूचना मुहैया कराने और कार्रवाई की कोई पहल की गई है। यह तो महज उदाहरण है, ऐेसे कई लोग हैं, जो सूचना मांगते हैं और विभागीय अधिकारी देने के बजाय गोल-मटोल जबाब देते हैं। पारदर्शिता लाने के लिए बना सूचना का अधिकार कानून ऐसे अधिकारियों के कारण बेकार साबित हो रहा है। ऐसी सूचना का क्या फायदा जो मौके पर न मिले।