बंदी बना वीआईपी, प्राइवेट वार्ड में चल रहा इलाज
लिखापढ़ी में इमरजेंसी में भर्ती और भेज दिया जिला अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में
सीएमएस बने अनजान, जेडी बोले, हमें नहीं सीएमएस को चलाना है अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। जेल में बंद एक हत्यारोपी वीआईपी बनकर जिला अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में मौज कर रहा है। हालांकि डॉक्टरों की मानें तो वह गंभीर बीमारी से पीड़ित है, मगर लिखापढ़ी में उसे इमरजेंसी में भर्ती किया गया है। वास्तव में उसे कोई गंभीर बीमारी नहीं है, बल्कि वीआईपी बनकर वह प्राइवेट वार्ड में जमानत होने का इंतजार कर रहा है।
आसपुर देवसरा थाना क्षेत्र का संतोष सिंह उर्फ पिंटू हत्या के मामले में दो साल से जिला जेल में बंद है। बुधवार को डीआईजी जेल डीआर वर्मा जेल का निरीक्षण करने आ रहे थे। जेल प्रशासन ने संतोष सिंह को रूटीन जांच के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। यहां डॉक्टर आरपी चौबे ने गंभीर हालत बताकर उसे भर्ती कर लिया। किसी को बंदी के बारे में कुछ जानकारी न हो, इसके चलते स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने लिखापढ़ी में संतोष को जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया और बाद में प्राइवेट वार्ड दे दिया। प्राइवेट वार्ड के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क भी नहीं लिया गया। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानी जाए तो डॉक्टर आरपी चौबे ने संतोष को इमरजेंसी में भर्ती किया था, मगर उसके साथ आए परिवार के लोग स्वास्थ्य कर्मचारियों पर उसे प्राइवेट वार्ड में रखने के लिए दबाव बनाने लगे। कर्मचारियों ने बंदी को वार्ड देने से इनकार कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों की मानी जाए तो इस दौरान परिवार के लोग विवाद करने लगे। जिस पर नर्स ने चाभी थमा दिया। परिजन उसे लेकर प्राइवेट वार्ड में चले गए। इन सबके बाद भी जिला अस्पताल के सीएमएस इससे अनजान बने रहे।
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11 माह तक प्राइवेट वार्ड में रह चुका है बैंक में गबन का आरोपी मैनेजर
दो साल पहले बैंक में गबन का आरोपी मैनेजर जेल के बजाए जिला अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में 11 माह तक आराम फरमाता रहा था। अमर उजाला ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की तो उसे फिर जेल भेजा गया था।
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बंदी के साथ लग्जरी वाहनों से आए थे लोग
जिला अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में इलाज करवा रहे हत्यारोपी के साथ लग्जरी वाहन से कुछ लोग आए थे। वह प्राइवेट वार्ड के आसपास घूम रहे थे। प्राइवेट वार्ड का गेट बंद कर रखे थे। खोलने नहीं दे रहे थे।
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संतोष इमरजेंसी वार्ड में ही भर्ती है। बेड फुल होने के कारण उसे प्राइवेट वार्ड में दो घंटे के लिए रखा गया था। इसके बाद फिर उसे इमरजेंसी वार्ड में रखकर इलाज किया जा रहा है।
आशुतोष सिंह, ईएमओ।
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प्राइवेट वार्ड जर्जर हो गए हैं। उसमें मरीज नहीं भर्ती किए जाते हैं। जगह के अभाव में बंदी को रखा गया था। उसे फिर इमरजेंसी वार्ड में लाकर इलाज किया जा रहा है। इमरजेंसी वार्ड के कुछ मरीजों को मेडिकल व सर्जिकल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है।
योगेंद्र यति, सीएमएस, जिला अस्पताल।