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भूख से अब नहीं होगी आवारा पशुओं की मौत, भूसा खरीदने को मिला एक करोड़

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भूख से अब नहीं होगी आवारा पशुओं की मौत, भूसा खरीदने को मिला एक करोड़
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तीस रुपये प्रतिदिन के हिसाब से होगा भुगतान
एसडीएम के संस्तुति पर गौशाला संचालकों को मिलेगी धनराशि
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। जिले के कांजी हाउस और गौशाला में बंद पशुओं को अब भूखे नहीं मरना होगा। शासन ने जिले को एक करोड़ देकर सभी कांजीहाउस और गौशालाओं को पानी और भूसा की व्यवस्था करने को कहा है। पशुपालन विभाग ने गौशाला संचालकों से डिमांड मांगी है।
जिले के कांजी हाउस और गौ शाला केंद्रों में कैद आवारा पशुओं की मौत अब भूख और प्यास से नहीं होगी। पशुओं को अब प्रतिदिन प्रति पशु 30 रुपये की दर से भुगतान किया जाएगा। शासन ने आवारा पशुओं की भूख मिटाने के लिए पहले चरण में एक करोड़ रुपये मुहैया कराया है। जिले के पट्टी इलाके के आसपुर देवसरा स्थित गोदलपट्टी के कबीर आश्रम में भूखे-प्यासे आवारा पशुओं के मौत होने का मामला प्रकाश में आने के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी गौशालाओं और कांजीहाउस के संचालकों से कहा है कि पशुओं को नियमित रुप से चारा-पानी देते रहे। इधर जिला प्रशासन को मिले एक करोड़ रुपये बांटने की तैयारी तेज कर दी गई है। धनराशि को वितरित करने के लिए तहसीलों के एसडीएम को नोडल अधिकारी बनाया गया है। गौशाला संचालक एसडीएम के माध्यम से ही मांग भेजेंगे और भुगतान भी उन्ही के माध्यम से होगा। फिलहाल जिला प्रशासन की इस पहल से कांजी हाउस और गौशाला संचालकों ने राहत की सांस ली है।
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इनसेट---------
ख्राने-पीने की खड़ी हो गई समस्या
जिला प्रशासन के दबाव में ग्रामीण और शहरी इलाकों में आवारा पशुओं को कैद कर दिया गया है, मगर खाने-पीने की व्यवस्था न होने से जानवरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। हालांकि शासन की इस पहल से गौशाला संचालकों को राहत मिली है।
इनसेट--
12 गौशाला केंद्रों की हो चुकी है स्थापना
आवारा पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए अभी तक 12 गौशाला केंद्रों की स्थापना हो चुकी है। पशुपालन विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाय, तो अभी तक लगभग पांच हजार पशुओं को गौशालाओं में कैद किया जा चुका है।
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वर्जन-----
कांजी हाउस और गौशाला में रहने वाले पशुओं को भूसा और पानी की अब कोई दिक्कत नहीं होगी। संचालकों को प्रत्येक पशु को प्रतिदिन की दर से 30 रुपये का भुगतान किया जाएगा। संचालक एसडीएम के माध्यम से धनराशि की मांग कर सकते हैं।
डॉ. विजय प्रताप सिंह, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी।
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