फेल हो गई कृषि और लघु सिंचाई विभाग की योजना
उद्यान विभाग को 4.01 करोड़, आईडब्ल्यूडीपी को 3.80 करोड़ रुपये मिले
सिंचाई विभाग की कार्ययोजना हुई बेकार, तीन साल में नहीं मिला एक पाई
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। जिले के कृषि विभाग और लघु सिंचाई विभाग योजनाओं को केंद्र सरकार ने ठुकराते हुए इस वर्ष धनराशि नहीं देने का फैसला किया है। जबकि सिंचाई विभाग को पहले ही झटका लग चुका है। पांच साल के लिए कार्ययोजना बनाकर भेजने वाले विभागों की मेहनत भी बेकार हो गई है। इस वर्ष उद्यान विभाग 4.01 करोड़ और सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग को 3.80 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
किसानों की आय दोगुनी करने के लिए असिंचित खेतों की सिंचाई करने के लिए विभिन्न विभागों से योजना तैयार करने को कहा गया था। केंद्र सरकार ने तीन वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना प्रारंभ करके सिंचाई विभाग, कृषि विभाग, उद्यान विभाग, लघु सिंचाई और सिंचाई और जल संसाधन विभाग से किसानों की फसल सिंचाई के लिए योजना तैयार करने को कहा था। सभी विभागों ने लंबी-चौड़ी कार्ययोजना बनाकर केंद्र सरकार को भेजा था। सिंचाई विभाग, कृषि विभाग और लघु सिंचाई विभाग की कार्ययोजना को केंद्र सरकार ने ठुकराते हुए उद्यान विभाग और सिंचाई और जल संसाधन विभाग को स्वीकार करते हुए गांव के अंतिम किसान के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए बजट जारी कर दिया है। उद्यान विभाग को 4.01 करोड़ और सिंचाई और जल संसाधन विभाग को 3.80 करोड़ रुपये से किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने को कहा है। विभाग में धनराशि आने के बाद से अधिकारी कमीशन के खेल सेट करने में लगे हुए हैं। फिलहाल विभागों से अभी तक विकास कार्य कराने के लिए कोई टेंडर नहीं हुआ है।
वर्जन----
जिले के उद्यान विभाग को 4.01 करोड़ और सिंचाई और जल संसाधन विभाग को 3.80 करोड़ रुपये मिले हैं। जबकि कृषि विभाग और लघु सिंचाई विभाग को फूटी कौड़ी नहीं मिली है।
डॉ.रघुनाथ सिंह, उपकृषि निदेशक।
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भूमाफिया करा रहे अवैध निर्माण
प्रतापगढ़। शहर के गायघाट रोड दहिलामऊ में पारिवारिक बंटवारे को लेकर एसडीएम सदर कोर्ट में मुकदमा चल रहा है। जिसमें एसडीएम सदर ने स्थगन आदेश जारी कर रखा है। एक पक्ष ने भू-माफियाओं के हाथ अपना हिस्सा बेच दिया। फिर क्या था, भू-माफियाओं ने मनमाने ढंग से नाप की और इंटरलॉकिंग सडक़ बनाने के साथ ही पक्के मकान का निर्माण शुरू कर दिया। एक माह से अवैध निर्माण हो रहा है, मगर वाद दायर करने वाले पीड़ित कभी डीएम, तो कभी एसपी के पास चक्कर लगा रहे हैं। मगर कोई सुनने वाला नहीं है। गुरुवार को लगभग एक दर्जन पीड़ितों ने जब एसडीएम सदर का घेराव करके पालन कराने को कहा, तो शहर कोतवाल को फोनकर मौके पर जाने को कहा। थोड़ी देर में शहर कोतवाल मौके पर पहुंचे, पहले तो तड़क-भड़क दिखाया, मगर भू-माफियाओं को देखते ही बगैर अवैध निर्माण रोकवाए ही चलते बने। एसडीएम सदर एसपी सिंह ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है, अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ जल्द ही कठोर कार्रवाई की जाएगी।