उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए किसानों की मिट्टी की जांच के नाम पर कृषि विभाग उनके साथ धोखा कर रहा है। विभागीय कर्मचारी मिट्टी की जांच के लिए नमूना तो ले लेते हैं, लेकिन किसानों को उसकी रिपोर्ट नहीं दी जा रही है। इससे जिले के किसानों को अपने खेत की उर्वरा शक्ति और जीवाश्म के बारे में कोई भी जानकारी नहीं हो पाती है। विभाग में हजारों मृदा स्वास्थ्य कार्ड डंप पड़े हैं।
किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कृषि विभाग ने खेतों की मिट्टी की जांच करने का अभियान चला रखा है। शासन का निर्देश हैं कि कर्मचारी गांव-गांव जाकर किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने ले आएं और प्रयोगशाला में जांच करने के बाद मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी करके मिट्टी में उपलब्ध तत्वों की जानकारी दें। जांच में अगर किसी तत्व की कमी है तो किसान को भरपाई करने के तौर-तरीके बताए जाएं।
मिट्टी की जांच दो प्रकार की होती है। सामान्य और सूक्ष्म जांच में मिट्टी की गुणवत्ता और अधिक खाद का प्रयोग करने से होने वाले नुकसान का आकलन किया जाता है। चालू वित्तीय वर्ष में सामान्य जांच के लिए 6013 और सूक्ष्म जांच के लिए 32,000 का लक्ष्य मिला हुआ है। विभागीय आंकड़ों पर गौर किया जाए तो अभी तक सामान्य जांच के लक्ष्य का पीछा करते हुए लगभग 5,256 मिट्टी के नमूनों की जांच हो चुकी है, जबकि सूक्ष्म जांच में लगभग 21,000 मिट्टी के नमूनों की जांच हो चुकी है। मई और जून में हुई जांच की रिपोर्ट तो तैयार हो गई है, मगर अभी तक किसानों को वितरित ही नहीं की गई है।
धूल फांक रही है 12 लाख की मशीन
मिट्टी की सामान्य जांच करने के लिए 12 लाख रुपये की लागत से भारी भरकम मशीन लगाई गई है। मगर इन दिनों जांच नहीं होने से मशीन धूल फांक रही है। मशीन की सुरक्षा के लिए एसी लगाया गया है, जिसे कर्मचारी चलाते ही नहीं हैं।
मिट्टी के नमूने के लिए बरतनी पड़ती है सावधानी
किसानों के खेत से मिट्टी का नमूना लेने के लिए विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। सामान्य किसान मिट्टी के नमूने नहीं ला सकते हैं, बल्कि कृषि विभाग के कर्मचारी खेतों में पहुंचकर मिट्टी के नमूने लाते हैं। दरअसल, खेत के चारों कोने और बीच के हिस्से से मिट्टी एकत्रित करके मिलाई जाती है, उसके बाद मिलाकर कई हिस्सों में बांटा जाता है।
मानदेय पर तैनात हैं कर्मचारी
मिट्टी की जांच करने के लिए संविदा पर कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इन कर्मचारियों का मानदेय निर्धारित कुछ होता है और एजेंसी भुगतान कम करती है। इससे वह कुंठित रहते हैं और अपना कार्य भी पूरी जिम्मेदारी से नहीं करते हैं।
किसानों की मिट्टी की जांच हो रही है। सूक्ष्म जांच और सामान्य जांच करके मृदा स्वास्थ्य कार्ड तैयार किया जा रहा है। जो कार्ड प्रयोगशाला में रखे हैं, उन्हें जल्द ही वितरित कर दिया जाएगा।
डॉ. रघुराज सिंह, उपनिदेशक, कृषि।