प्रतापगढ़। इस साल 2018 में सिर्फ 45 दिन ही ऐसे होंगे, जब लोगोें के घरों में शहनाई बज सकेगी। इस साल शादी विवाह के मुहूर्त काफी कम हैं। साल का पहला महीना भी बिना शादी विवाह के लगन के बीत रहा है। 2018 में बृहस्पति और शुक्र ग्रह के अस्त होने से सहालग की तिथियां काफी कम पड़ रहीं हैं। वहीं सहालग अधिक न होने के कारण कारोबारियों को अपने व्यापार की चिंता सता रही है।
ज्योतिषाचार्य पंडित लक्ष्मीकांत द्विवेदी ने बताया कि साल की शुरूआत में ही शुक्र ग्रह के अस्त होने से जनवरी का लगभग पूरा महीना ही बिना शादी-बारातों के बीत रहा है। इतना ही नहीं शादी ब्याह के लिए सबसे शुभ दिन माना जाने वाला बसंत पंचमी का पर्व भी सोमवार को बीत गया। बसंत पंचमी के दिन से ही शादियां करना लोगों की पसंद रहती है, लेकिन इस बार पूरी जनवरी लगन का शुभ मुहूर्त नहीं है। फरवरी माह में भी केवल पांच दिन ही शादी का मुहूर्त है। फिर 15 मार्च से 16 अप्रैल तक एक माह का खरमास रहेगा। इस दौरान सूर्य मीन राशि में होने से शादी ब्याह कम ही होंगे। इसके बाद 16 मई से 13 जून तक अधिक मास होने के कारण शादी का मुहूर्त नहीं है। नवंबर माह में गुरु अस्त रहेगा। इस कारण एक भी मुहूर्त नहीं पड़ रहा है। सहालग की तारीखें कम पड़ने के कारण ज्वैलरी, कपड़े, मैरिज हाल, गेस्ट हाउस वालों के माथे पर चिंता की लकीरें दौड़ने लगी हैं। वे अपने कारोबार को लेकर परेशान हैं। सहालग में अधिक बिक्री होने के लिए कारोबारियों ने कंपनियों को सामान की सप्लाई का आर्डर भी दे रखा है।
अधिक मास हर तीन साल में एक बार आता है। इसे अधिमास या पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। इस माह में कोई भी मांगलिक कार्य नहीं होते। इस बार ज्येष्ठ मास में अधिमास रहेगा। आमतौर पर ज्येष्ठमास में मांगलिक कार्य होते हैं लेकिन इस वर्ष अधिक मास होने के कारण कम मुहूर्त रहेंगे। इस साल शादी विवाह के दिन कम होने के कारण व्यवसाय पर काफी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। कारोबारियों की मानें तो महंगाई के बाद जीएसटी ने वैसे ही प्रभावित कर रखा है। उस पर साल की पहला महीना भी सन्नाटे में बीतने जा रहा है। कपड़ा व्यापारी सुरेंद्र सिंह की मानें तो जनवरी तक आधी दुकान खाली हो जाया करती थी। सहालग न होने के कारण दुकान में माल भरा पड़ा है। बच्चों के मुंडन संस्कार के लिए वर्ष 2018 में मात्र 12 मुहूर्त ही मिलेंगे। ये सभी मुहूर्त फरवरी से जून माह के बीच हैं। मुंडन के सर्वाधिक चार मुहूर्त फरवरी की 10, 17, 20 और 25 तारीख को हैं। मार्च में चार, छह और 13 तारीख, अप्रैल में 20 और 27 तारीख, मई में सिर्फ 10 और जून में 22 व 25 को मुंडन संस्कार हो सकेगा।