गांवों में फिर चकबंदी प्रक्रिया चालू करने की कवायद शुरू
शुक्रवार को लगभग डेढ़ दर्जन गांवों में आयोजित हुई बैठक
अमल उजाला ब्यूरो
सांगीपुर। दस वर्ष से अधिक समय से चकबंदी के लिए अधिसूचित गांवों को चकबंदी बाहर किए जाने के बाद फिर चकबंदी प्रक्रिया के तहत लाने की कवायद शुरू हो गई है। इसके लिए डेढ़ दर्जन राजस्व गांवों में अधिकारियों की तैनाती कर खुली बैठक कराई गई। लालगंज तहसील के सात दर्जन के करीब गांवों को वर्ष 2008 में चकबंदी प्रक्रिया में शामिल किया गया था। राज्य सरकार की अधिसूचना जारी होने के बाद चकबंदी वाले गांवों का राजस्व अभिलेख तहसील से चकबंदी विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया। कुछ गांवों में चकबंदी की कार्रवाई चलती रही। पर कई गांव ऐसे थे जहां चकबंदी की कार्रवाई ठप पड़ी थी। तत्कालीन चकबंदी आयुक्त ने इसको गंभीरता से लिया और पहले तो ऐसे गांवों की रिपोर्ट मंगवाई जहां अधिसूचना को जारी हुए दस वर्ष की समयावधि बीत चुकी थी। इसके बाद भी चकबंदी की कार्रवाई नही शुरू हुई। इस बिंदु पर चकबंदी विभाग द्वारा शासन को रिपोर्ट दी गई। शासन ने उन गांवों की अधिसूचना रद़्द करते हुए चकबंदी से बाहर कर दिया और राजस्व अभिलेख तहसील मुख्यालय भेज दिए गए। राजस्व अभिलेख जब तहसील पहुंच गया तो दाखिल खारिज, अमल दरामद व अन्य कार्य तहसील से शुरू हो गए। इसी बीच फिर मंगापुर, बड़हुआं, पट्टी कचेहरा, भुड़हा, जोगापुर, कटेहटी, मुुस्तफाबाद, उस्मानपुर, शाहबरी, राजमतीपुर, बूबूपुर कटरा, भवानीगढ़, नौबस्ता, पूरे मुरली कमयनपुर, मखदूपुर व ओरीपुर नौगीर आदि गांवों में चकबंदी के लिए काश्तकारों की बैठक बुलाकर उनकी राय जानने के लिए तहसीलदार लालगंज, सीओ शैलेंद्र द्विवेदी और ओंकारशरण सिंह, सहायक चकबंदी अधिकारी सांगीपुर, सदर, कुंडा, समेत दर्जनभर अधिकारियों क ो बैठक के लिए नामित किया गया। शुक्रवार को इन गांवों की बैठक आयोजित की गई। जिसमें यह राय जानी गई कि गांव वाले चकबंदी की कार्रवाई चाहते हैं या नहीं। बताया जाता है कि अधिकारी गांव में बैठक कर अपनी रिपोर्ट उपसंचालक चकबंदी के माध्यम से जिलाधिकारी को प्रेषित करेंगे। अगर सबकुछ ठीक रहा तो शीघ्र ही इन गांवों को पुन: चकबंदी प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।