प्रचार में धूम मचाने वाले ‘कार्यकर्ताओं’ पर भारी धूप
आधा दर्जन चुनाव प्रचारकों पर हीट-स्ट्रोक का अटैक
तीखी धूप में झुलस रही मेहनतकश लोगों की भी सेहत
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। प्रत्याशियों का प्रचार कर रहे कई समर्थक हीट-स्ट्रोक की चपेट में हैं। आम लोग भी इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं। इसका कारण तेज धूप में देर तक घूमना है। 24 घंटे के भीतर हीट-स्ट्रोक की चपेट में आए 15 लोग अस्पताल पहुंचे। हालांकि, उपचार बाद उनकी हालात सामान्य हो गई। हीट स्ट्रोक के अटैक से हर कोई बेचैन हो जाता दिखा।
इन दिनों धूप आग की तरह बरस रही है। सुबह दस बजे से ही तल्ख धूप लोगों को बीमार बनाने पर उतारू है। इस धूप में देर तक ठहर पाना मुश्किल हो रहा है। लोकसभा का चुनाव प्रचार भी पूरी तरह चरम पर है। प्रचार कर रहे समर्थक क्षेत्र में दिन-रात घूम रहे हैं। धूप की परवाह किए बगैर वे प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं। रविवार दोपहर से लेकर सोमवार सुबह तक प्रचार करने वाले प्रत्याशी के समर्थक हीट स्ट्रोक की चपेट में आ रहे हैं। रविवार को पारा 44 डिग्री के पार रहा। गुरुवार को प्रचार में जुटे बलीपुर के रमेश (30), कादीपुर अचलपुर के दीपक कुमार (25), जेल रोड के सुरेश कुमार (20) मुमशाद (19), पट्टी कस्बा के मुजाहिद (40), सिटी के रामफल (30) व ब्रम्हदीप मिश्र (35) , सदर के मो. इलियास (21), चिलबिला के सूरजदीन (20) हीट-स्ट्रोक के शिकंजे में आ गए। वे सभी अलग-अलग पार्टियों के प्रचारक हैं। उधर सहोदरपुर के राकेश कुमार (31) व स्टेशन रोड के रोहित शर्मा (35), कांशीराम कालोनी जोगापुर के सुखदेव (35) भी रविवार को घर से कामधंधे की गरज से दिन-भर धूप में टहले। ये लोग भी हीट-स्ट्रोक की चपेट में आ गए। सभी को इलाज के लिए जिला अस्पताल लाया गया। उपचार बाद उन लोगों की हालत ठीक हो गई। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में इलाज करने वाले डा. आशुतोष सिंह ने बताया कि रविवार की देर रात हीट-स्ट्रोक की गिरफ्त में आए ज्यादा तर लोग किसी न किसी दल के प्रचारक थे। उनके आने के साथ ही नेताजी की सिफारिश भी उपचार के लिए पहुंचती रही। डॉक्टर बताते हैं कि धूप में देर तक खाली पेट काम करना व पानी कम पीने से हीट-स्ट्रोक का खतरा बन जाता है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक मनोज खत्री कहते है बीमार लोगों का इलाज किया जा रहा है। जिनकी हालत में सुधार होता गया है। उनकी छुट्टी कर दी गई।
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क्या है हीट-स्ट्रोक
एक स्वस्थ व्यक्ति के बदन का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस होता है। जब मौसम का तापमान इससे अधिक होता है तो दोनों में टकराहट होती है। शरीर का कम तापमान अधिक यानी मौसम के तापमान को ग्रहण करता है। ऐसे में शरीर का तापमान बढ़ जाता है। इसी को मेडिकल भाषा में हीट-स्ट्रोक कहा जाता है।
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लक्षण और रोग की पहचान
चूंकि हीट-स्ट्रोक से शरीर का तापमान बढ़ जाता है, इस लिए पूरा बदन गर्म यानी तेज बुखार की चपेट में आ जाता है। शरीर की बढ़ी गर्मी से दिमाग की नसें काफी गर्म हो जाती हैं। इससे सिर फटने जैसा दर्द व चक्कर आने लगता है। कभी-कभी दिमागी नसें काम करना बंद कर देती हैं और इंसान पागल हो जाता है। इससे मौत भी हो सकती है।
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बचाव के कुछ खास उपाय
हीट-स्ट्रोक से बचना है तो खुद सतर्क रहें। धूप में खाली पेट देर तक बिल्कुल न रहें। सिर पर गमछा या तौलिया जरूर रखें। धूप से आते ही छांव में बैठकर तुरंत ठंडा पानी, कोल्ड-ड्रिंक न पीयें और न नहाएं ही। धूप में देर तक रहना है तो हर आधे घंटे पर तीन-चार घूंट पानी पीते रहें।
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हीट-स्ट्रोक धूप की नजरंदाजी से होता है। इसमें ध्यान न देने पर इंसान की मौत भी हो सकती है। इस लिए समय से इलाज कराना बहुत जरूरी है। धूप तेज हो रही है, ऐसे में सावधान रहने की आवश्यकता है।
डॉ. अरविंद श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी