दो दलों से सांसद बने थे अजीत प्रताप
दोनों बार पार्टी बदलने में संकोच नहीं किया
प्रतापगढ़। एक जमाना था जब बेल्हा की राजनीति में प्रतापगढ़ राजघरानों की तूती बोलती थी। पार्टी के मुखिया टिकट देने के लिए राजा को स्वयं बुलाते थे। राजघराना पार्टियों की हवा का रूख देखकर टिकट लेता था। यही वजह रही कि अजीत प्रताप सिंह जिले से दो बार सांसद बने और उन्होंने दोनों बार पार्टी बदलने में संकोच नहीं किया। चुनाव मैदान में कूदने वाले अजीत प्रताप सिंह को दोनों बार सफलता मिली।
प्रतापगढ़ के अजीत प्रताप सिंह ने जिले से दो बार सांसद का चुनाव लड़ा। दोनों बार अलग-अलग पार्टियों से मैदान में कूदे और सफलता भी मिली। वर्ष 1962 में जनसंघ के टिकट पर जीत हासिल करने वाले अजीत प्रताप सिंह को 47.97 प्रतिशत मत मिले थे। उन्होंने यह जीत पं. मुनीश्वरदत्त उपाध्याय को भारी अंतर से हराकर हासिल की थी। मुनीश्वरदत्त उपाध्याय को करीब 72,779 और अजीत प्रताप सिंह को 96,483 मत मिले थे। 1980 में अजीत प्रताप सिंह ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। अजीत प्रताप सिंह को लगभग 94,223 मत मिले, दूसरे स्थान पर रहे जय सिंह को तकरीबन 80,038 और राजा दिनेश सिंह को करीब 79,736 मत मिले थे। दिनेश सिंह ने कांग्रेस से विद्रोह करके चुनाव लड़ा था। मगर उन्हें सफलता नहीं मिली थी। अजीत प्रताप सिंह के पुत्र अभय प्रताप सिंह ने चार चरणों में तीन दलों से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें 1991 के चुनाव में ही सफलता मिली। जनता दल से चुनाव मैदान में कूदने वाले अभय प्रताप सिंह ने भाजपा प्रत्याशी उदयराज मिश्र को परास्त किया था। इसके अलावा अभय प्रताप सिंह ने 1989 में जनता दल, 1998 में सपा और 1999 में भाजपा से चुनाव लड़ा, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। अनिल प्रताप सिंह भाजपा से टिकट के लिए लाइन में थे, लेकिन ऐनवक्त पर उनका पत्ता कट गया।