बसपा सरकार में बनी शहर की चार कांशीराम कालोनियों में अपात्रों को खोजने में जिला प्रशासन को पांच साल तक पसीना बहाना पड़ा। पांच सालों में 258 लोग अपात्र मिले हैं। जिनका आवंटन निरस्त करने के लिए पत्रावली जिलाधिकारी के पास भेजी गई है। आवास पाने वाले अधिकांश लोगों ने या तो उसे किराए पर दे रखा है या फिर ताला बंद कर खुद बाहर रहते हैं।
बसपा सरकार में शहर के जीआईसी, जोगापुर, कृषि भवन और मुर्गीफार्म के करीब गरीबों के लिए कांशीराम कालोनी बनाई गई थी। जिसमे कुल 15 सौ आवास बनाए गए थे। जीआईसी में 168, जोगापुर में 648, मुर्गीफार्म में 288 और कृषि भवन में 396 आवास बनाए गए थे। इसके लिए शहर में रहने वाले पात्रों का चयन नगर पालिका और जिला प्रशासन की टीम ने किया था। बसपा सरकार में बहुत से अपात्रों को भी आवास आवंटित हो गया था। प्रदेश में सपा सरकार आने के बाद दिसंबर 2013 में कांशीराम कालोनी में रहने वाले अपात्रों को चिह्नित करने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई, लेकिन यह काम पूरा नहीं हो सका। सूबे की भाजपा सरकार ने भी जरूरतमंदों को आशियाना उपलब्ध कराने के लिए कांशीराम कालोनियों की ओर निगाह उठाई। वर्ष 2017 से शुरू हुई छानबीन अब जाकर पूरी हुई है।
नगर पालिका और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम की छानबीन में चारों कालोनी में रहने वाले 258 लोग अपात्र मिले हैं। इसमें से अधिकांश ने आवासों को किराए पर दे रखा है। बहुत से लोगों ने अपने कमरे में ताला बंद दिया है और खुद अपने पुराने ठिकाने पर रहते हैं। कुछ लोगों के पास हर संपन्न लोगों की तरह सुविधाएं हैं। अपर जिलाधिकारी मनोज ने बताया कि कालोनियों में रहने वाले अपात्रों को चिन्हित कर लिया गया है। उनका आवंटन निरस्त कराने की प्रक्रिया चल रही है।