जिले में बिजली विभाग की मनमानी के कारण बिजली संकट खड़ा हो गया है। लक्ष्य पूरा करने के चक्कर में अफसरों ने एक साल में 55000 हजार कनेक्शन सौभाग्य योजना के तहत बांट दिए, जबकि नई लाइन नहीं बिछाई गई। उपकेंद्र अपग्रेड नहीं हुए, फीडर वही हैं, उपभोक्ता बढ़ गए। नतीजा यह कि ओवरलोड के कारण हर दिन ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं। हद तो यह है कि अभी जिले में दो लाख कनेक्शन और बांटने के लिए बिजली विभाग ने जोर लगा रखा है।
जिले में 3 लाख से अधिक पंजीकृत विद्युत उपभोक्ता हैं। हाउस होल्ड सर्वे के अनुसार जिले में अभी तीन लाख ऐसे उपभोक्ता हैं जो बिजली से वंचित है। शासन की ओर से हर घर को बिजली से रोशन करने के लिए सौभाग्य योजना की शुरुआत की गई है। विद्युतीकरण के लिए 389 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ है। विभाग की मानें तो विद्युतीकरण का कार्य करीब चार महीने से जारी है। मगर हकीकत तो यह है कि अब तक विद्युतीकरण के नाम पर एक भी पोल नहीं लग सके हैं। जबकि कनेक्शन वितरण के लक्ष्य को पूरा करने के लिए विभाग ने अभियान छेड़ रखा है।
योजना के तहत मुफ्त कनेक्शन वितरित किए जा रहे हैं। दबाव का ही नतीजा है कि अब तक 55 हजार कनेक्शन बांट दिए गए। जबकि न तो खपत के अनुरूप बिजली की व्यवस्था की गई है और न ही उपकरण दुरुस्त हुए। 55 हजार कनेक्शन में करीब 40 हजार से अधिक कनेक्शनधारी ऐसे हैं जो दूर से केबिल खींचकर बिजली जला रहे हैं। ऐसे में संबंधित फीडरों, ट्रांसफार्मरों पर लोड भी बढ़ गया है। यही वजह है कि आए दिन कभी फीडर फुंक रहे हैं तो कभी ट्रांसफार्मर। शहर से लेकर गांव तक बिजली व्यवस्था बदहाल है। शहर में 24 घंटे व गांव में 18 घंटे का रोस्टर है। मगर उपभोक्ताओं को रोस्टर के अनुरूप बिजली नसीब नहीं हो पा रही है। आलम यह है कि गांव में 18 घंटे के सापेक्ष महज 10 घंटे जबकि शहर में 24 घंटे में महज 14 से 16 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। लोड के चलते फीडर फुं कने, तार टूटने, ट्रांसफार्मर जलने की समस्या आपूर्ति में बाधक बन रही है। मगर विभागीय अफसर समस्या को लेकर संजींदा नहीं हैं। इस बारे में अधीक्षण अभियंता एसके सिंह ने बताया कि समस्या को लेकर विभाग गंभीर है। विद्युतीकरण का कार्य जल्द शुरू होगा। फीडरों, ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई जा रही है। आपूर्ति व्यवस्था सुचारू बनाया जा रहा है।
दिसंबर तक विद्युतीकरण का कार्य पूरा करने का है लक्ष्य
जिले के वंचित मजरों को विद्युतीकरण से संतृप्त करने के लिए 389 करोड़ का बजट मिला है। दिसंबर 2018 तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य है। मगर अभी तक महज विद्युतीकरण के नाम पर पोल ही गिर सके हैं। तार व अन्य उपकरण का पता नहीं है। ऐसे में महज चार महीने में लक्ष्य कैसे पूरा होगा।