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50 प्रतिशत पैनल खराब, रोस्टर के मुताबिक नहीं मिल रही बिजली

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50 प्रतिशत पैनल खराब, रोस्टर के मुताबिक नहीं मिल रही बिजली
शार्ट सर्किट व अधिक लोड के चलते ठप रहती है आपूर्ति
सालभर से पैनलों को बदलने की महज कागज पर कवायद
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। अंग्रेजों के जमाने के पैनलों के सहारे जिले के 50 प्रतिशत उपकेंद्रों से विद्युत आपूर्ति की जा रही है। बदहाल पैनलों के चलते शार्ट सर्किट व अधिक लोड से आए दिन आपूर्ति बाधित रहती है। सबसे ज्यादा समस्या ग्रामीण क्षेत्रों में बनी हुई है। सालभर पहले ऐसे पैनलों को बदलने के लिए पहल शुरू की गई थी, मगर सफलता नहीं मिल पाई। इससे उपभोक्ताओं को रोस्टर के मुताबिक बिजली नहीं मिल पा रही है।
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जिले में चार विद्युत वितरण पारेषण खंड है। सदर, रानीगंज, लालगंज व कुंडा। चारों पारेषण खंड मिलाकर कुल 67 विद्युत उपकेंद्र हैं। जिले में 6 लाख से अधिक पंजीकृत विद्युत उपभोक्ता हैं। शासन का निर्देश है कि उपभोक्ताओं को रोस्टर के मुताबिक बिजली आपूर्ति की जाए। शहरी उपभोक्ताओं को 24 घंटे व ग्रामीण इलाके में 20 घंटे विद्युत आपूर्ति का निर्देश है। मगर जिले के उपभोक्ताओं को रोस्टर के मुताबिक बिजली नहीं मिल पा रही है। खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं को। गर्मी के दिनों से बिजली कटौती की समस्या गंभीर हो गई है। फीडर फुंकने, जर्जर तार टूटने समेत शार्ट-सर्किट से बिजली आपूर्ति में बाधा आ रही है। उपकेंद्र के बदहाल पैनल इसके मुख्य कारण हैं। उपकेंद्र पर स्थित इनकमिंग व आउटगोइंग पैनल पर आपूर्ति व्यवस्था निर्भर होती है। विभागीय सूत्रों की मानें तो जिले के रानीगंज, पट्टी, कुंडा, सदर, लालगंज क्षेत्र के 50 प्रतिशत उपकेंद्रों के पैनल चार से पांच दशक पुराने हैं। वह बदहाल हो चुके हैं। इन पर क्षमता से अधिक लोड भी है। इससे आए दिन फुंकने की समस्या बनी रहती है। इतना ही नहीं इससे फीडर फुंकने व आग लगने की समस्या भी बनी रहती है। विभाग की ओर से सालभर पहले ऐसे पैनलों को चिह्नित कर बदलने की पहल शुरू की गई थी। इसके लिए विभागीय अधिकारियों ने कागजी कोरम पूरा किया। मगर बदहाल पैनलों के दिन नहीं बहुर सके। स्थिति जस की तस बनी हुई है। गर्मी के दिनों में बदहाल पैनलों के उपभोक्ताओं को रोस्टर के मुताबिक बिजली नहीं मिल पा रही है। अधिशाषी अभियंता कुंडा उमाकांत ने बताया कि जर्जर पैनलों को दुरुस्त किया गया है। पैनलों में ट्रिपिंग होने लगी है। इससे आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित नहीं होती, हालांकि जर्जर पैनलों को बदलने के लिए भी कवायद की जा रही है।
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