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जलती-तपती दोपहरी में बूथ पर लाइन लगाने से कतराते हैं मतदाता

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जलती-तपती दोपहरी में बूथ पर लाइन लगाने से कतराते हैं मतदाता
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1962 में ठंडी के दिनों में मतदान होने पर पड़े थे 52.91 प्रतिशत मत 1977 से भीषण गर्मी में हो रहा है लोकसभा का चुनाव
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। गर्मी के दिनों में होने वाले लोकसभा चुनाव में मतदाता जलती-तपती दोपहरी में बूथों पर लाइन में खड़े होने से कतराते हैं। यही कारण है कि तमाम प्रयास के बाद भी मतदान प्रतिशत नहीं बढ़ पाता है। 1977 के बाद से लगातार गर्मी के दिनों में ही लोकसभा चुनाव हो रहे हैं और चुनाव आयोग, जिला प्रशासन के तमाम प्रयास के बाद भी मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है।
कौशांबी संसदीय सीट की कुंडा और बाबागंज विधानसभाओं में छह मई और प्रतापगढ़ संसदीय सीट के लिए 12 मई को मतदान होगा। मई माह में चिलचिलाती धूप के बीच खुले में बूथों पर मतदाताओं को लाना इस बार भी बड़ी चुनौती है। मतदान का समय सुबह सात बजे से शाम को छह बजे तक रखा गया है। सुबह गांव के लोग घरेलू कामकाज निपटाने में व्यस्त होते हैं। नौ बजे के बाद इतनी तेज धूप हो जाती है कि लोग सहन नहीं कर पाते हैं। ऐेसे में भीषण गर्मी में बूथ पर लाइन में खड़े होकर अपनी बारी की प्रतीक्षा करने वाले लोग कम ही होते हैं। शाम तीन बजे के बाद बूथों पर इतनी भीड़ बढ़ जाती है कि मतदाता बूथ पर पहुंचने के बाद भी किनारा काट लेते हैं। वर्ष 1962 में ठंडी के दिनों में हुए चुनाव में जिले के 52.91 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने अधिकार का प्रयोग किया था। इस चुनाव में जिले के अजीत प्रताप सिंह ने 47.97 प्रतिशत मतों के साथ विजयी हुए थे। हालांकि 1977 के बाद से लोकसभा का चुनाव गर्मी में ही हुआ है और मतदान प्रतिशत 46 प्रतिशत के आसपास ही रहा है।
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चुनाव का वर्ष मतदान प्रतिशत
1977 46.72
1980 43.68
1989 46.78
1991 40.30
1996 43.99
1998 38.69
1999 42.96
2004 42.99
2009 47.48

बूथों पर धूप से बचने के लिए नहीं है कोई इंतजाम
जिले में छह और 12 मई को होने वाले मतदान के दिन बूथों पर शेड का कोई प्रबंध नहीं किया गया है। 2616 बूथों पर मतदान को उत्सव के रूप में मनाने को तो कहा जा रहा है, मगर मतदाताओं को धूप और गर्मी से राहत देने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया जा रहा है।
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