कर्जमाफी का इंतजार कर रहे जिले के छह हजार किसान अफसरों की चौखट नापकर निराश हो गए हैं। ऑनलाइन फीडिंग होने के बाद भी शासन ने चुप्पी साध ली है। इससे किसान कभी बैंक तो कभी अधिकारियों के दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं। आलम यह है कि अधिकारी कर्जमाफी को लेकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
कर्जमाफी योजना में शामिल जिले के 5,678 किसान ऐसे हैं, जिनकी जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ऑनलाइन फीडिंग करा दी गई है। मगर दो महीने के बाद भी कोई सूचना नहीं आई। किसान अफसरों की चौखट नाप-नाप कर थक गए। मगर अफसरों की ओर से कोई ठोस आश्वासन भी नहीं मिला। वास्तव में वित्तीय वर्ष बीतने के बाद से एक भी किसान का कर्ज माफ नहीं किया गया है। इधर, शासन की ओर से कर्जमाफी के दायरे में आने वाले किसानों को लॉलीपाप देने का सिलसिला जारी है। अभी तक किसानों का डाटा ऑनलाइन होते ही बैंकों में कर्जमाफी की धनराशि आ जाती थी। मगर अब आलम यह है कि किसानों का जो डाटा ऑनलाइन करके भेजा गया है, उसकी पुन: जांच कराई जा रही है। विभागीय अधिकारियों का दावा है, जांच के बाद ही डाटा ऑनलाइन किया जाता है। बीते सप्ताह कर्जमाफी में शामिल 2,754 किसानों को डाटा यह कहकर वापस कर दिया गया कि नए सिरे से मामले की जांच कराएं। इससे विभागीय अधिकारी एक बार फिर गांव-गांव पहुंचकर जांच का अभियान चलाया है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. अश्विनी सिंह ने बताया कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद डाटा शासन को भेजा जाएगा। इसके बाद ही कर्जमाफी की कोई सूचना मिलेगी।