कंट्रोल पैनल बदहाल, फुंक रहे उपकेंद्र के ट्रांसफार्मर
उपभोक्ताओं को बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। भीषण गर्मी में विद्युत उपकेंद्र के बदहाल कंट्रोल पैनल उपभोक्ताओं के लिए सिरदर्द बने हैं। वर्षों पुराने पैनल तार टूटने व ट्रिपिंग के दौरान लोड का संतुलन नहीं बना पा रहे है। इससे इसका प्रभाव उपकेंद्र स्थित मुख्य ट्रांसफार्मर पर पड़ रहा है। इससे आए दिन मुख्य ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं को बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में चार विद्युत पारेषण खंड हैं। रानीगंज, कुंडा, लालगंज और सदर। इसके तहत 67 विद्युत उपकेंद्र हैं। गर्मी शुरू होने से पहले विद्युत विभाग ने अभियान चलाकर आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए जर्जर तार व फीडर सही करने का कार्य किया, लेकिन बिजली आपूर्ति व्यवस्था सुचारू बनाने वाले पैनलों पर ध्यान नहीं दिया। रानीगंज, पट्टी, लालगंज, कुंडा व सदर क्षेत्र में अधिकांश विद्युत उपकेंद्रों के पैनल बदहाल हैं। वर्षों पुराने कंट्रोल पैनल लोड का संतुलन नहीं बना पा रहे हैं। इससे आए दिन उपकेंद्र के मुख्य ट्रांसफार्मर फुंक जा रहे हैं। संड़वाचंद्रिका ब्लाक के गड़वारा विद्युत उपकेंद्र का ट्रांसफार्मर गर्मी के मौसम में दो बार फुंक चुका है। हफ्तेभर से अधिक उपकेंद्र की आपूर्ति बाधित रही। भीषण गर्मी में उपभोक्ताओं को बिजली संकट झेलना पड़ा। इसी तरह रानीगंज उपकेंद्र में भी मुख्य ट्रांसफार्मर फुंकने से करीब चार दिन तक विद्युत आपूर्ति ठप रही। स्थानीय बाजार के साथ ही करीब दो दर्जन गांवों की आपूर्ति ठप रही। पट्टी क्षेत्र के उपकेंद्रों के पैनल की भी दशा ठीक नहीं है। यहां भी बदहाल पैनलों के चलते आपूर्ति बाधित रहती है। इस बारे में एक्सईएन प्रथम चंद्रमा प्रसाद ने बताया कि प्रस्ताव भेजा गया है। जल्द ही बदहाल पैनल बदले जाएंगे।
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सीधा पड़ता है ट्रांसफार्मर पर प्रभाव
कंट्रोल पैनल लाइन को संतुलित करता है। कंट्रोल पैनल बदहाल होने से यह सुचारू रूप से कार्य नहीं कर पाता है। इससे लाइन ट्रिप होने, तार टूटने से सीधे इसका प्रभाव ट्रांसफार्मर पर पड़ता है। बार-बार ऐसे होने से ट्रांसफार्मर खराब हो जाता है।
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पैनलों को बदलने के लिए हो चुकी है पहल
बदहाल पैनलों को बदलने के लिए सालभर पहले तत्कालीन एक्सईएन रामसनेही ने पहल की थी, लेकिन सालभर बीत जाने के बाद भी बदहाल पैनलों के दिन नहीं बहुरे। अब इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।