वारदात के बाद अलग-अलग हो जाते थे तौकीर व अतीक
रात में ठिकाना बदल देता था तौकीर, करीबी भी रहते थे अनजान
17 दिन से अतीक व तौकीर का नहीं हुआ थी भेंट
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। जिले की कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन चुके एक लाख के इनामी तौकीर व पचास हजार के अतीक केवल वारदात को अंजाम देने के लिए ही साथ रहते थे। रात में तौकीर अपना ठिकाना बदल देता था। जिसकी भनक उसके करीबी लोगों को भी नहीं होती थी। 17 दिन से अतीक व तौकीर की मुलाकात नहीं हुई थी। केवल दोनों फोन पर ही बातें करते रहे।
एसटीएफ की मानें तो शातिर बदमाश तौकीर व अतीक वारदात को अंजाम देने के लिए ही तय स्थान पर मिलते थे। उस ठिकाने की जानकारी केवल उन दोनों को या फिर घटना में शामिल साथियों को कुछ देर पहले हुआ करती थी। तौकीर व अतीक वारदातों के बाद अलग-अलग दिशा में पनाह लेने के लिए निकल जाते थे। करीब 17 दिन पहले तौकीर व अतीक की मुलाकात हुई थी। इस दौरान दोनों फोन से ही बातें किया करते थे। मकसूद के पकड़े जाने के बाद तौकीर व अतीक ने अपना ठिकाना बदल दिया था। तौकीर हमेशा चौकन्ना रहता था। वह मकसूद का बेहद करीबी था लेकिन रात के समय वह अकेले ही निकल जाता था। वह कहां जाता है। इस बारे में किसी को भी जानकारी नहीं होती थी। मुंबई में एसटीएफ धमकने के बाद मकसूद की नजर टीम पर पड़ गई। उसने कोड में तौकीर को जानकारी दे दी और वह भागने में कामयाब रहा।
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मनियारपुर में कई दिनों तक छिपे रहते थे तौकीर व अतीक
अंतू थाना क्षेत्र के रसूलपुर गुलरहा का मनियारपुर भी तौकीर व अतीक का ठिकाना रहा है। पुलिस सूत्रों की मानें तो जेल में निरुद्ध आरिफ तौकीर व अतीक को अपने घर पर शरण देता था। चूंकि इलाके के लोग दोनों को नहीं पहचानते थे। तौकीर वहां के लोगों से अपना नाम राजाराम पांडेय बता रखा था। शहर की कई घटनाओं के बाद दोनों मनियारपुर पहुंच जाया करते थे। दोनों को कंधई, जेठवारा, लालगंज व अंतू इलाके के लोग पनाह देते थे।
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सीआरपीएफ के सिपाही पर था तौकीर को भरोसा
नगर कोतवाली के आजाद नगर निवासी तौकीर अपराध की दुनिया में कदम रखने के बाद कोहड़ौर थाना क्षेत्र के रानीगंज मदुरा निवासी हब्बू सरोज व सद्दाम का साथ पकड़ लिया। हब्बू व सद्दाम का एक दोस्त उड़ीसा के त्रिवेंदरम में सीआरपीएफ में सिपाही के पद पर तैनात है। बैंक लूट के बाद हब्बू, सद्दाम व तौकीर ने वहीं पनाह ली थी। हब्बू व सद्दाम के जेल जाने के बाद तौकीर भी वारदात के बाद त्रिवेंद्रम भाग जाता था। जहां वह रहता था। तौकीर को सीआरपीएफ के सिपाही पर पूरा भरोसा था।