दो दशक बाद प्रतापगढ़ में खिला कमल
1998 के लोकसभा चुनाव में रामविलास वेदांती ने पार्टी का खोला था खाता
1999 में कांग्रेस, 2004 में सपा, 2009 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के खाते में रही प्रतापगढ़ की सीट
2014 में भाजपा से गठबंधन में अपना दल ने हासिल की थी जीत
1962 में जनसंघ प्रत्याशी अजीत प्रताप सिंह ने कांग्रेस के दिग्गज नेता मुनीश्वरदत्त को हराया था
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। प्रतापगढ़ लोकसभा सीट पर जीत के लिए संघर्ष कर रही भाजपा करीब दो दशक बाद यहां कमल खिलाने में कामयाब हो पाई है। 1998 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रामविलास वेदांती ने कांग्रेस की राजकुमारी रत्ना सिंह को हराकर यहां पार्टी का खाता खोला था। महज एक साल के भीतर भाजपा की सरकार गिरने के बाद फिर भाजपा कभी यहां से नहीं जीती। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा से गठबंधन में यह सीट अद के खाते में चली गई। भाजपा के सहयोग से अपना दल प्रत्याशी हरिवंश सिंह को यहां जीत मिली थी। लोकसभा चुनाव 1999 में कांग्रेस, 2004 में सपा और 2009 में फिर कांग्रेस ने इस सीट पर कब्जा जमाया था। हालांकि इससे पहले जनसंघ ने 1962 में कांग्रेस के दिग्गज प्रत्याशी मुनीश्वरदत्त को हराया था। दो दशक के बाद प्रतापगढ़ सीट पर भाजपा को मिली ऐतिहासिक जीत से भाजपाई जश्र में डूबे हैं।
प्रतापगढ़ के सियासी इतिहास पर नजर दौड़ाएं तो प्रतापगढ़ में पहली बार भाजपा का कमल 1998 के लोकसभा चुनाव में खिला था। भाजपा प्रत्याशी राम विलास वेदंाती ने 329027 मत पाकर कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमारी रत्ना सिंह को करारी शिकस्त दी थी। रत्ना सिंह को 164467 मत मिले थे। जबकि सपा प्रत्याशी अक्षय प्रताप सिंह गोपालजीे 72584 मत पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। कें द्र में भाजपा की सरकार बनी, लेकिन महज एक ही वर्ष के भीतर गिर गई। इसके बाद से प्रतापगढ़ में भाजपा की लहर नहीं दिखी। 1999 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी अभय प्रताप सिंह को कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमारी रत्ना सिंह ने करारी शिकस्त दी। 2004 लोकसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी गोपालजी 238128 मत पाकर विजयी रहे। भाजपा के रमाशंकर सिंह पांचवें स्थान पर चले गए। वहीं वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी लक्ष्मीनारायण पांडेय तीसरे स्थान पर रहे। इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमारी रत्ना सिंह ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रतापगढ़ सीट भाजपा के साथ गठबंधन में अपना दल के खाते में चली गई। यहां से अद प्रत्याशी हरिवंश सिंह ने 375789 मत पाकर बसपा प्रत्याशी आसिफ सिद्दीकी को करारी शिकस्त दी।
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1991 में जीतते-जीतते हार गई थी भाजपा, 1996 में हुई थी कांटे की टक्कर
1991 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी उदयराज मिश्रा व जनता दल प्रत्याशी अभय प्रताप सिंह के बीच कांटे की टक्कर हुई थी। हर कोई भाजपा की जीत को लेकर आश्वस्त था। भाजपा के खेमे जश्र की तैयारी शुरू हो गई थी। मगर अंतिम चरण की मतगणना शुरू हुई तो चुनाव अभय प्रताप के पक्ष में चला गया। जद प्रत्याशी अभय प्रताप सिंह को 110838 मत मिल थे, जबकि भाजपा प्रत्याशी उदयराज को 107142 मत। भाजपा प्रत्याशी उदयराज मिश्रा को अभय प्रताप ने 3696 मत से हराया था। इसके बाद 1996 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी उदयराज मिश्रा व कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमारी रत्ना सिंह के बीच कांटे की टक् कर हुई। राजकुमारी रत्ना सिंह को 139326 मत मिले जबकि उदयराज को 117689 मत मिले थे। राजकुमारी रत्ना सिंह ने उदयराज मिश्रा को 21637 मतों से हराया था।