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गमगीन माहौल में सैकड़ों लोगों ने दी शहीद सिपाही को अंतिम विदाई
गाजीपुर में शहीद हुए सिपाही के शव से लिपटकर बिलख पड़ी बेटी, बेटे की आंखों से बहते रहे आंसू
अर्थी उठते ही हर आंख नम, लच्छीपुर में तीसरे दिन भी पसरा रहा सन्नाटा
अमर उजाला ब्यूरो
रानीगंज (प्रतापगढ़)। गाजीपुर में भीड़ हिंसा में शहीद सिपाही को सोमवार को गम-गुस्से और गुबार के बीच सैकड़ों लोगों ने अंतिम विदाई दी। अंतिम संस्कार के लिए उनका शव प्रयागराज ले जाया गया, जहां उनका अंतिम संस्कार हुआ। शव से लिपटकर बेटी रो पड़ी। बेटे की आंखों से लगातार आंसू बहते रहे। सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में शहीद सिपाही के पार्थिव शरीर को सलामी देने के बाद अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। अर्थी उठते ही हर आंखों से आंसू बहने लगे। पूरे गांव में तीसरे दिन भी सन्नाटा पसरा रहा।
रानीगंज थाना क्षेत्र के लच्छीपुर निवासी सुरेश प्रताप वत्स की गाजीपुर में शनिवार को सड़क जाम करने वाले उपद्रवियों ने पथराव करने के बाद पीटकर हत्या कर दी थी। रविवार की शाम 26 घंटे बाद शव घर पहुंचा तो परिवार के लोग उनका चेहरा देख सके। पत्नी व परिवार के लोगों ने आरोपियों को फांसी पर चढ़ाने की सरकार से मांग की। सोमवार की सुबह शहीद सिपाही के पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई देने के लिए सीओ रानीगंज रमेश चंद्र व रानीगंज थानाध्यक्ष मय फोर्स पहुंचे। सलामी के बाद जैसे ही शहीद सिपाही की अर्थी को लोग कंधा देने के लिए आगे बढ़े कि बेटी कोमल व नेहा पिता के शव से लिपटकर बिलख पड़ीं। बेटे विनीत की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। पत्नी डिंपल को परिवार की महिलाएं सहारा देती रहीं। वहां मौजूद हजारों लोगों ने नम आंखों से अपने चहेते को अंतिम विदाई दी। रसूलाबाद घाट पर अंतिम संस्कार के लिए परिजन पार्थिव शरीर लेकर रवाना हुए। तीसरे दिन भी लच्छीपुर में सन्नाटा पसरा रहा।
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विलंब से पहुंचे पुलिस अफसर, आक्रोश
शहीद सिपाही सुरेश प्रताप वत्स के पार्थिव शरीर को सोमवार की सुबह नौ बजे अंतिम संस्कार के लिए ले जाना था। समय पर सीओ रानीगंज व पुलिस फोर्स नहीं पहुंची। जिससे परिवार के साथ ही ग्रामीण आक्रोशित हो उठे। हालांकि कुछ देर में ही सीओ रानीगंज फोर्स के साथ पहुंचकर सलामी दी।