शहर के जर्जर मकानों में रहने वाले लोगों की जान पर खतरा मंडरा रहा है। जर्जर हो चुके मकानों को खाली करने के लिए नगर पालिका की ओर से हर साल सिर्फ नोटिस थमाया जाता है। इसके बाद भी लोग अपना मकान न तो खाली करते हैं और न ही उसकी मरम्मत कराते हैं। शहर के 150 से अधिक जर्जर गृहस्वामियों को पालिका की ओर से नोटिस दिया जा चुका है। फिर भी वह उसी मकान को आशियाना बना रखे हैं। ऐसे में किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
नगर पालिका क्षेत्र में 25 वार्ड हैं। कई वार्डों में पुराने मकान हैं। देखरेख के अभाव में करीब 150 से अधिक रिहायशी मकान जर्जर हो चुके हैं। इसमें श्रीराम तिराहे पर स्थित एक स्कूल भी शामिल है। जिसमें लोगों ने आशियाना बना रखा है और वहां पर स्कूल भी संचालित होता है। करीब डेढ़ साल पहले अतिक्रमण हटाने के दौरान कई जर्जर मकानों की दशा देख खुद अफसर भी हैरत में पड़ गए थे। तत्कालीन उपजिलाधिकारी के आदेश पर जर्जर मकानों को खाली करने के साथ ही उसकी मरम्मत या फिर उसे जमींदोज किए जाने का नोटिस गृहस्वामियों को थमाया गया था। इसके बावजूद ऐसे गृहस्वामी पर कोई असर नहीं पड़ा। मौजूदा समय में भी लोग ऐसे जर्जर मकानों को अपना आशियाना बनाए हुए हैं। ऐसे में अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता।
नगर पालिका की ओर से नोटिस थमाने के बाद अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली गई है। कई दिनों से लगातार हो रही बरसात के चलते अब मकानों की छतें टपकने लगी हैं। शहर के बेगमवार्ड, पल्टन बाजार, भैरोपुर वार्ड, पड़ाव वार्ड, धर्मशाला वार्ड, तहसील वार्ड, मकंद्रूगंज, टक्करगंज वार्ड में अभी भी लोग जर्जर मकानों में रहते हैं। मकानों की छतों के प्लास्टर भले ही टूटकर गिरते रहते हैं। खतरे के बावजूद कोई मकान नहीं खाली करता। जिंदगी दांव पर लगाकर लोग घरों में रहते हैं। नया माल गोदाम रोड, स्टेशन रोड पर कुछ दिनों पहले बारजा ढह गया था। हालांकि लोग बाल-बाल बच गए थे। खास बात यह है कि नोटिस थमाने के बाद जिंदगी दांव पर लगाने वाले लोगों के खिलाफ संबंधित अफसर कोई ठोस कदम नहीं उठाते।