प्रतापगढ़। वर्ष 2011 में सामाजिक आर्थिक गणना में बरती गई लापरवाही की सजा लाखों ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। सामाजिक आर्थिक गणना में शामिल पात्रों को ही योजना का लाभ दिया जा रहा है, पात्रता सूची से बाहर रहने वाले परिवारों के लाख फरियाद के बाद भी कोई अधिकारी सुनने को तैयार नहीं है। इससे वास्तविक गरीबों को योजना से वंचित होना पड़ रहा है।
वर्ष 2011 में पूरे जिले में सामाजिक आर्थिक गणना में जिले के 2,14,916 परिवार गरीब मिले थे। उज्ज्वला गैस योजना, प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास जैसे सभी योजनाओं का लाभ इन्हीं लोगों को दिया जाना है। शासन ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि अब सामाजिक आर्थिक गणना में चिह्नित परिवारों को ही योजना का लाभ दिया जाएगा। शासन के इस फैसले से सर्वे रिपोर्ट से छूटे हुए गरीबों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो जिले में लगभग सवा दो लाख परिवार ऐसे हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने कारण योजना के पात्र हैं। मगर शीर्ष अधिकारियों की ओर से इस दिशा में कड़ा पत्र जारी किया गया है, कि वर्ष 2011 की सूची में जो लाभार्थी हैं, उन्हीं को योजनाओं में शामिल किया जाय।
दरअसल में सामाजिक आर्थिक गणना में व्यापक लापरवाही की गई है। सर्वे में लगाए गए कर्मचारियों की उदासीनता का यह परिणाम रहा कि जो बड़ा गांव था, उसके कई मजरों में सर्वे ही नहीं हुआ था। जब सर्वे नहीं हुआ, तो गरीबों का नाम सूची में आने की बात ही नहीं उठती है। संडवा चंद्रिका विकास खंड के पूरबगांव में बेड़ियान बस्ती का सर्वे ही नहीं किया गया, इससे दलित परिवार वाला गांव सभी योजनाओं से वंचित रह जा रहा है।
अधिकारी भी कर चुके हैं वकालत
वर्ष 2011 में तैयार हुई सूची में लापरवाही बरतने की शिकायत और वास्तविक पात्रों का नाम छूटने की वकालत विभागाध्यक्षों ने शीर्ष अधिकारियों तक कर चुके हैं। मगर अभी तक छूटे हुए लोगों को शामिल करने के लिए कोई योजना नहीं बनी है। इससे गरीब कभी विकास भवन, तो कभी ब्लाक का चक्कर लगा रहे हैं।
सामाजिक आर्थिक गणना में हुई चूक की जानकारी शीर्ष अधिकारियों तक पहुंचा दी गई है। जिस परिवार का नाम सूची में नहीं है। सभी ब्लाकों में अलग से रजिस्टर बनाकर विवरण अंकित किया जा रहा है। शासन से गाइड लाइन आते ही योजना में शामिल किया जाएगा।
अरविंद सिंह, प्रभारी सीडीओ/ पीडी
आर्थिक गणना में लापरवाही की सजा भुगत रहे लाखों ग्रामीण
अफसरों के सुझाव के बाद भी नहीं आई कोई गाइडलाइन
आवास, गैस जैसी योजनाओं से हुए बाहर, नहीं सुन रहा है कोई अधिकारी