गणतंत्र दिवस के पहले 26 आश्रय केंद्रों का शुभारंभ
भवन तैयार होने के पहले होगी वैकल्पिक व्यवस्था
टाउन एरिया कटरामेदनीगंज, अंतू और महुली में बनेगा भवन, कुंडा के बेती में कांजी हाउस की हो रही मरम्मत
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। किसानों की लहलहाती फसल को नष्ट करने वाले आवारा पशुओं से निजात दिलाने के लिए भवन तैयार होने के पहले वैकल्पिक व्यवस्था करने की कवायद तेज कर दी गई है। जिले के 17 विकास खंडों और आठ टाउन एरिया और नगरपालिका परिषद के महुली में एक-एक आश्रय केंद्र बनाया जाएगा। आश्रय केंद्रों का भवन बनाने के लिए तीन माह का समय दिया गया है। फिलहाल गणतंत्र दिवस के पहले 26 आश्रय केंद्रों को वैकल्पिक रुप से प्रारंभ कर दिया जाएगा।
गेहूं, आलू, सरसों, चना और मटर की फसलों को चौपट करने वाले आवारा पशुओं से किसानों को जल्द ही निजात मिलने जा रही है। जिले के 17 विकास खंडों, आठ टाउन एरिया और नगरपालिका परिषद में आश्रय केंद्र खोलने का निर्देश दिया है। ब्लाकों में स्थापित होने वाले आश्रय केंद्रों के लिए सभी ग्राम पंचायतों से दस-दस हजार रुपये मांगे गए हैं। खंड विकास अधिकारियों ने प्रधानों की बैठक करके यह प्रयास भी तेज कर दिया है। किसानों की फसलों को बचाने के लिए इन दिनों जिला प्रशासन ने पूरा ध्यान केंद्रित कर रखा है। डीएम ने सभी बीडीओ को पत्र भेजकर वैकल्पिक आश्रय केंद्रों को 26 जनवरी तक प्रारंभ करने को कहा है। डीएम ने स्वयं कटरामेदनीगंज और महुली स्थल का निरीक्षण कर अविलंब वैकल्पिक व्यवस्था करने को कहा था। कुंडा स्थित बेती और लालगंज में पुराने कांजी हाउस को दुरुस्त किया जा रहा है, तो कटरामेदनीगंज और अंतू में तैयारियां पूरी हो गई हैं।
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दस कांजीहाउस बनाने के लिए चिह्नित हुआ स्थल
जिला पंचायत ने दस कांजी हाउस खोलने का फैसला लिया है। कुंडा के बेती, मानधाता के सहेरुआ, रामपुरसंग्रामगढ़ के संग्रामगढ़, रामपुर संग्रामगढ़ के धारुपुर, संडवा चंद्रिका के कटकामानापुर, मंगरौरा के कंधई मधुपुर, मंगरौरा के कोहंडौर, लक्ष्मणपुर के जेठवारा में कांजी हाउस का निर्माण कराने के लिए जमीन का चिंहांकन कर लिया गया है। जबकि कुंडा के बेती में स्थित कांजी हाउस की मरम्मत हो रही है।
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रानीगंज में गो संरक्षण केंद्र का प्रारंभ हुआ निर्माण
रानीगंज तहसील के खमपुर दूबे पट्टी में 3.43 करोड़ से निर्मित होने वाले गो सरंक्षण केंद्र का निर्माण प्रारंभ कर दिया गया है। इसमें सबसे अधिक लगभग 2500 आवारा पशुओं को रखने की व्यवस्था होगी। इसमें 15 कर्मचारियों की तैनाती होगी, जो पशुओं के देखभाल के साथ ही गायों से निकलने वाले दूध का सदुपयोग करेंगे।
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जिले में गो आश्रय केंद्र भवन निर्माण में समय लगेगा। इसलिए सभी ब्लाकों और टाउन एरिया में वैकल्पिक व्यवस्था करने को कहा गया है। यह सभी केंद्र 26 जनवरी के पहले प्रारंभ हो जाएंगे। इसके बाद भवन निर्माण की प्रकिया प्रारंभ की जाएगी।
डॉ.वीपी सिंह, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी