फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रतिदिन एक करोड़ खर्च करने में स्वास्थ्य विभाग को छूट रहा पसीना

विज्ञापन
विज्ञापन
शासन ने कहा बजट खपाओ, हर दिन एक करोड़ खर्च करने में फूल रही सांस
विज्ञापन

स्वास्थ्य विभाग के पास 31 करोड़ रुपये शेष, खर्च करने के लिए नहीं दिख रहा काम
शासन ने दिया आदेश, 31 मार्च के पहले खत्म किया जाए बचे हुए बजट को
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। शासन के एक फरमान से इन दिनों स्वास्थ्य विभाग की सांस फूल रही है। वित्तीय वर्ष में शासन ने विभाग को कुल 77 करोड़ रुपये का बजट दिया था। अभी तक विभाग 46 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। 31 करोड़ रुपये विभाग के पास बचे हैं। सूबे के मुखिया ने इस बजट को 31 मार्च तक हर हाल में खपाने के लिए आदेश दिया है। यानि स्वास्थ्य विभाग को तकरीबन हर दिन एक करोड़ रुपये खर्च करने हैं। शासन के इस आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की सांस फूल रही है। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि बजट कहां और कैसे खपाया जाए।
सरकारी अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधा मुहैया हो सके। अस्पताल में नए उपकरण खरीदे जा सकें, अस्पताल की रंगाई और पुताई के साथ प्रचार-प्रसार के नाम पर योगी सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को वित्तीय वर्ष में 77 करोड़ रुपये का बजट पास किया था। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानी जाए तो 11 माह में स्वास्थ्य विभाग महज 46 करोड़ रुपये ही खर्च कर सका। 31 करोड़ रुपये स्वास्थ्य विभाग के पास बचे हैं। बीते गुरुवार को सूबे के मुखिया सीएम योगी आदित्यनाथ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान सीएमओ को आदेश दिया है कि हर हाल में 31 मार्च तक शेष धनराशि को किसी तरह से खर्च करें। मगर अब सीएमओ के पास महज 27 दिन बचे हैं। ऐसे में सीएमओ से लेकर उनके अफसर परेशान हैं। 31 करोड़ रुपये खर्च करने में उनकी सांस फूल रही है। सूत्र बताते हैं कि स्वास्थ्य विभाग अब आननफानन में उपकरण भी खरीदता है तब भी इतनी धनराशि नहीं खर्च हो सकती है।
विज्ञापन

इनसेट---------
46 करोड़ खर्च, फिर भी दवा के लिए भटक रहे मरीज
11 माह के अंदर स्वास्थ्य विभाग ने 46 करोड़ रुपये तो खर्च कर दिए, लेकिन इसके बावजूद मरीज दवाओं के लिए भटकते रहे। एचआईवी के मरीजों का ऑपरेशन नहीं किया जा सका। शासन ने इतनी धनराशि दवा से लेकर उपकरण खरीदने और मरीजों के हित में खर्च करने के लिए स्वास्थ्य विभाग को दी थी। मगर जनपद के लोग दवा के लिए इतने दिनों तक भटकते रह गए। सीएमओ ने 11 माह के भीतर 46 करोड़ रुपये पानी की तरह खर्च कर दिए। मगर दवा और उपकरण नहीं खरीद सके। जिसके चलते मरीजों को अभी तक जहां ज्यादातर दवाएं बाजार से खरीदनी होती हैं, वहीं एक्सरे से लेकर अल्ट्रासाउंड जांच बाहर से करानी पड़ रही है। बजट होते हुए भी विभाग के जिम्मेदार उसे खर्च करने के बजाए बचाने में जुटे थे। प्रचार और प्रसार के नाम पर महज खानापूर्ति की गई। अब सीएम ने फटकार लगानी शुरू कर दी। 31 मार्च के पहले पूरे धनराशि को खर्च करने के लिए आदेश दिया तो अफसर परेशान हो गए।
इनसेट----------
दो माह से एंटीरैबीज इंजेक्शन के लिए मरीज परेशान
दो माह से एंटीरैबीज इंजेक्शन का अकाल है। मरीज परेशान हो रहे हैं। बजट होते हुए भी सीएमओ एंटीरैबीज इंजेक्शन नहीं मंगवा पा रहे हैं। इतना ही नहीं जनपद में सात एचआईवी पीड़ित हैं, जिनका ऑपरेशन नहीं किया जा रहा है। बार-बार यह बताया जा रहा है कि इनके ऑपरेशन के बाद उपकरण को फेंक दिया जाता है। नए उपकरण से मरीजों का ऑपरेशन किया जाता है। यदि सीएमओ उपकरण मंगवा लिए होते तो शायद एचआईवी पीड़ितों का भी ऑपरेशन और इलाज हो जाता।
विज्ञापन

वर्जन-----------
शासन जो भी बजट देता है उसका पाई-पाई का हिसाब लेता है। जो भी बजट खर्च किया जा रहा है उसका रिकार्ड शासन को भेजा जाता है। ऐसे में नियमानुसार ही बजट को खर्च किया जाएगा। बचे बजट को शासन को लौटा दिया जाएगा। जो दवाएं खत्म हैं, उन्हें मंगवाया जा रहा है।
अरविंद कुमार श्रीवास्तव, सीएमओ।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें