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बैंकों के 22 करोड़ दबाकर बैठे हैं जिले के 5825 बकाएदार

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प्रतापगढ़। बैंकों की लुटिया डुबाने में जिले के डिफाल्टरों ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। जनपद के 5825 लोगों ने बैंकों से कर्ज लिया, लेकिन लौटा नहीं रहे हैं। विभिन्न इन लोगों पर 22 करोड़ 18 लाख का बकाया है। 436 बकाएदार ऐसे हैं, जिनके बारे में कुछ पता नहीं चल पा रहा है। बैंक अधिकारियों के साथ ही राजस्व विभाग की टीम रिकवरी के लिए निरंतर प्रयासरत है, मगर उनके लापता होने से वसूली नहीं हो पा रही है।
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जिले में नोटबंदी के बाद बैंकों ने कर्ज देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। जिन्होंने पहले से कर्ज ले रखा है, वह देने को तैयार नहीं हैं। जिले में चिह्नित 5825 लोगों ने बैंक से कर्ज लिया, मगर वापस करने के नाम पर हाथ खड़े कर दिए। आलम यह है कि डिफाल्टर अभी भी 22.18 करोड़ रुपये दबाकर बैठे हुए हैं। 436 बकाएदार ऐसे हैं, जो बैंकों से कर्ज लेने के बाद गायब हो गए हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि जब बैंक कर्मियों ने उनके हिस्से की जमीन खोजना प्रारंभ किया, तो पता चला कि वह फरार हैं। हालांकि नोटबंदी के बाद से बैंकों ने कर्ज देने में काफी सावधानी बरतनी शुरू कर दी है। जिसका परिणाम रहा कि चालू वित्तीय वर्ष में मात्र 42,456 लोगों को ही कर्ज दिया गया है। जबकि वर्ष 2017 में 40,111 और वर्ष 2015 में 92,478 लोगों को कर्ज बांटा गया था। हालांकि आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अधिक लोगों को कर्ज बांटा गया है। फिलहाल वर्ष 2015 में लोन के लिए आवेदन करने वालों को कर्ज के लिए इतनी मशक्कत नहीं करनी होती थी।


लालगंज के सुरेशचंद्र हैं जिले के सबसे बड़े बकाएदार
जिले के लालगंज तहसील के खपरैलन का पुरवा निवासी सुरेशचंद्र पांडेय पुत्र मोहनलाल पांडेय सबसे बड़े बकाएदार हैं। इन पर 20,20,275 रुपये का बकाया है। इनकी चल और अचल संपत्ति की नीलामी के लिए 19 दिसंबर की तिथि जिला प्रशासन ने नियत की है। इसके अलावा लालगंज के खानीपुर निवासी सुरजीत सिंह पुत्र सुरेंद्र सिंह 15,31,313 रुपये, जयनारायण पुत्र माताबख्श ननौती, लालगंज 10,81,716 के कर्जदार हैं।
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आयकर चुकता करने वालों को ही मिलता है कर्ज
बैंकों ने कर्ज लेने के लिए सख्त कर दिया है। आधारकार्ड, पैन कार्ड के साथ ही तीन वर्ष का आयकर रिटर्न देखने के बाद ही बैंककर्मी ऋण देते हैं। इससे प्राइवेट नौकरी के साथ ही छोटी-मोटी नौकरी करने वालों को बैंक कर्ज नहीं दे रहे हैं। इससे कर्जदारों की संख्या में जहां कमी आ रही है, वहीं आम लोग बैंक का चक्कर लगाना भी बंद कर दिए हैं।


निजी बैंकों में मची है लूट
जिले के निजी बैंकों में कर्ज के लिए लूट मची हुई है। मध्यम वर्गीय परिवारों को राष्ट्रीयकृत बैंकों से कर्ज नहीं मिलने के कारण निजी बैंक कर्ज के नाम पर मनमाना ब्याज, सरचार्ज वसूल रहे हैं। अधिक ब्याज दर के साथ ही बैंक अफसर कमीशन भी वसूल रहे हैं। वास्तविकता तो यह है कि निजी बैंक मजबूरी का नाजायज फायदा उठा रहे हैं।
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