प्रतापगढ़। वाणिज्य कर विभाग में वकालत करने के लिए अब एलएलबी की डिग्री आवश्यक नहीं होगी, बल्कि कोई भी स्नातक, एकाउंटेंट और क्लासटू अधिकारी प्रैक्टिस कर सकता है। व्यापारियों की सुविधा के लिए जीएसटी में ये नए प्रावधान किए गए हैं।
सूबे में एक जुलाई से लागू हो रहे वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) में व्यापारियों को एक बड़ी राहत दी गई है। व्यापारियों की व्यस्तता, काम का बोझ कम करने और सस्ता न्याय प्रदान करने के लिए नई पहल की है। अब उन्हें अपने मुकदमे की पैरवी के लिए वकीलों के पीछे-पीछे नहीं घूमना होगा, बल्कि स्नातक करने वाला कोई भी व्यक्ति व्यापारियों का पक्ष रख सकता है। जीएसटी के प्रावधान के मुताबिक कोई एकाउंटेंट और क्लास टू अधिकारी भी व्यापारियों का पक्ष रख सकता है। मगर उसे जीएसटी में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा। हालांकि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना अधिवक्ताओं के लिए भी अनिवार्य कर दिया गया है। अधिवक्ताओं के रजिस्ट्रेशन कराने पर उन्हें भी पासवर्ड दिया जाएगा। अगर कोई व्यापारी किसी अधिवक्ता को अपने वाद की सुनवाई के लिए अधिकृत करता है, तो ऑनलाइन ही चयन करना होगा। फिलहाल जीएसटी की इस पहल से व्यापारियों को काम जहां आसान होगा, वहीं वह घर बैठे प्रगति की जानकारी कर सकेंगे। फिलहाल अधिवक्ताओं के रजिस्ट्रेशन के लिए एक जुलाई से वेबसाइट खुल जाएंगी। वाणिज्य कर विभाग में अब फाइलें आलमारी की धूल नहीं फांक पाएंगी, बल्कि फाइल के एक-एक पन्ने ऑनलाइन होंगे। तारीख पर होने वाली कार्रवाई भी अपडेट होगी। इससे व्यापारी घर बैठे मुकदमे के प्रगति की जानकारी हासिल कर सकेंगे।
व्यापारियों का बढ़ गया खर्चा
वाणिज्य कर विभाग पूरी तरह ऑनलाइन होने से व्यापारियों का खर्चा बढ़ गया है। जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराने वाले व्यापारियों को कंप्यूटर आवश्यक कर दिया गया है। कम पढ़े-लिखे व्यापारियों को एक कंप्यूटर ऑपरेटर भी रखना होगा। जो प्रतिदिन आने वाली मेल, बाजार भाव, नोटिस की जानकारी कर सकें। ऐसा नहीं करने पर व्यापारियों का नुकसान होगा।
-
ऑफलाइन नहीं होगा कोई काम
वाणिज्य कर विभाग में अब कोई भी कार्य ऑफलाइन नहीं होगा। व्यापारियों को प्रांत के अंदर माल खरीदना हो, या बाहर। अब उन्हें विभाग का चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि घर बैठे ऑनलाइन टैक्स चुकता करके प्राप्त कर सकते हैं।
व्यापारियों का पक्ष रखने के लिए यह जरूरी नहीं है कि वह अधिवक्ताओं ही हो, बल्कि स्नातक करने वाला कोई भी व्यक्ति प्रैक्टिस कर सकता है। हां इतना जरूर है कि उसे जीएसटी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। अगर कोई अधिवक्ता रजिस्ट्रेशन नहीं कराता है, तो वह विभाग में प्रैक्टिस नहीं कर पाएगा।
हरिसहाय सिंह, उपायुक्त, वाणिज्य कर विभाग, प्रतापगढ़।