अब वोट के टेंडर से प्रत्याशियों में घमासान
मतदाताओं को पाले में करने का ठेका, गांव, बाजार और चौराहों पर तय किए जा रहे ठेकेदार
कई गांवों में प्रत्याशियों ने प्रधानों, दबंग किस्म के लोगों और छुटभैया नेताओं को दी जिम्मेदारी
प्रतापगढ़। लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतरे आठ प्रत्याशी अब वोट के लिए पसीना बहा रहे हैं। वोटरों को अपने पाले में करने के लिए घमासान मच गया है। शहर के बस्तियों और मोहल्लों और गांवों में वोट का टेंडर होने लगा है। नेताओं ने हर मोहल्ले, गांव और चौराहों पर दबंग किस्म के लोगों के साथ ही प्रधानों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। इन्हें अपने-अपने इलाकों के वोटरों को साधने की जिम्मेदारी दी जा रही है। वोट बैंक मजबूत करने के लिए छुटभैया नेताओं का भी सहारा लिया जा रहा है। ऐसे लोग प्रत्याशियों को आश्वासन दे रहे हैं कि उनकी बस्ती और मोहल्ले का सारा वोट उन्हीं के पक्ष में जाएगा।
चुनाव का दिन जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे छुटभैया नेताओं और दबंग किस्म के लोगों की कद्र तेजी से बढ़ती जा रही है। चुनाव मैदान में कूदे प्रत्याशी खुद तो गांव बाजार और मोहल्लों की खाक छान रहे हैं, लेकिन उन्हें अपने पर भरोसा कम है। ऐसे में उम्मीदवारों में मतदाताओं को अपने पाले में करने के लिए कई तरकीब खोज निकाली है। अपने खास लोगों की मदद से उन्होंने हर विधानसभा क्षेत्र के गांव, बाजार मोहल्लों और चौराहों की प्रभावशाली लोगों की सूची तैयार कराई है। अब ऐसे लोगों से अकेले में संपर्क साधा जा रहा है। चुनाव जीतने के बाद उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी और हर तरह की सहूलियत उपलब्ध कराने का वायदा किया जा रहा है ताकि वह अपने प्रभाव वाले वोटरों को उनके पक्ष में मतदान करा सके। चौराहों और मोहल्लों की राजनीतिक तक ही सिमटे लोगों की पूछ अचानक बढ़ गई है। प्रत्याशी उन्हें गाड़ी के साथ हर सुविधा मुहैया करा रहे हैं। हालांकि कई रसूखदार लोगों ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। वे दरवाजे तक आने वाले प्रत्याशियों को केवल आश्वासन दे रहे हैं। ऐसे प्रभावशाली लोग प्रत्याशियों को तौलना चाहते हैं। नाम न छापने की शर्त पर कुछ रसूखदार लोगों ने बताया कि उनसे सभी दलों के प्रत्याशी संपर्क साध रहे हैं। अभी किसी के लिए प्रयास शुरू नहीं किया गया है। अखिरी वक्त तक इंतजार करने के बाद जीत रहे प्रत्याशी को सपोर्ट करेंगे ताकि उनसे चुनाव जीतने के बाद काम लिया जा सके।
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मठाधीशों पर प्रत्याशियों की नजर
चुनावी समर में कूदे नेताओं को वोटरों से ज्यादा मठाधीशों की चिंता है। वे उन पर बराबर नजर रखे हुए हैं। गंवई और चौराहे व मोहल्ले के सियासत में अपना प्रभाव रखने वाले मठाधीश सभी दलों के संपर्क में रहते हैं। ऐसे में प्रत्याशी जानते हैं कि जिधर वे घूमेंगे उधर उनके साथ सैकड़ों वोटर पलटी मार जाएंगे। ऐसे में नेताओं के करीबी ऐसे रसूखदारों को पाले में करने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। मठाधीशों के यहां प्रत्याशियों के करीबी लगातार चक्कर लगाते हुए मान सम्मान की दुहाई दे रहे हैं। सिर पर हाथ रखवाकर आशीर्वाद भी मांग रहे हैं।
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गंवई वोट के ठेकेदार भी हुए सक्रिय
लोकसभा चुनाव में कूदे प्रत्याशियों की हालत ऐसी हो गई है कि वह अपना वोट बैंक मजबूत करने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। इसका फायदा गंवई वोट के ठेकेदार उठा रहे हैं। नेताओं के यहां उठने बैठने व जी हुजूरी करने वाले लोग नेताओं को वोट दिलाने और मठाधीशों को उनके पाले में करने का झांसा देकर जेब ढीली करने में लगे हैं। ऐसे लोगों को नेता भी बखूबी जानते हैं लेकिन इस वक्त उनकी मांगें पूरी करना और उन पर भरोसा जताना मजबूरी है।