प्रतापगढ़। डीएपी और यूरिया खाद अब परचून की दुकानों पर नहीं मिलेगी। अब लाइसेंसी दुकानों और अधिकृत केंद्रों से ही खाद मिलेगी। खाद बिक्री में फर्जीवाड़ा को बंद करने के लिए आधार को अनिवार्य कर दिया गया है।
पॉस (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीन से डीएपी और यूरिया की बिक्री एक जनवरी से अनिवार्य होगी। जिले के जितने दुकानदारों ने लाइसेंस लिया है या विभाग के जो बिक्री केंद्र हैं, अब उन्हीं दुकानों से खाद की बिक्री की जाएगी। लाइसेंसी दुकानों और बिक्री केंद्रों पर उपलब्ध पॉस मशीन पर अंगूठा लगाते ही किसान का ब्यौरा आ जाएगा। किसान के पास जितनी भूमि होगी, उसी के अनुपात में किसानों को खाद दी जाएगी। शासन ने बीते वर्ष भी पॉस मशीन से खाद की बिक्री अनिवार्यता की थी, लेकिन कुछ ही दिन में यह व्यवस्था फेल हो गई थी। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि एक जनवरी से लागू होने वाली योजना सफल रहेगी। पॉस मशीन से खाद की बिक्री होने से किसानों से अतिरिक्त रुपये की उगाही भी नहीं हो पाएगी। यहीं नहीं अब बिक्री केंद्रों और साधन सहकारी समितियों से नकली खाद की बिक्री भी नहीं होगी।
संडवा चंद्रिका के साधन सहकारी समिति पचखरा से नकली खाद मिलने से किसान दंग रह गए थे। जिले के किसानों को खाद मुहैया कराने की जिम्मेदारी इफको को सौंपी गई है। शासन ने स्पष्ट कहा है कि अब सब्सिडी की राशि उसी दशा में दी जाएगी, जब आधार से किसानों को खाद बिक्री की जाएगी। अगर ऐसा नहीं किया जाता है, तो डीएपी और यूरिया पर मिलने वाली सब्सिडी नहीं मिलेगी।
वहीं सहायक निबंधक सहकारिता अरविंद प्रकाश का कहना है कि एक जनवरी से डीएपी और यूरिया की बिक्री पॉस मशीन से की जाएगी। जिस किसान के पास आधार होगा, उसे ही खाद मिलेगी। इस योजना के लागू होने से किसानों को सीधे फायदा होगा।