विवादित ढांचा विध्वंस के बाद एक हजार से भी अधिक लोग गए जेल
विहिप और संघ से जुड़े लोगों को पुलिस ने किया था गिरफ्तार, भेजा गया था नैनी जेल
प्रतापगढ़। अयोध्या में विवादित ढांचा विध्वंस के बाद जिले के एक हजार से भी अधिक लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। पुलिस ने संघ और विहिप से जुड़े लोगों को गिरफ्तार कर नैनी जेल भेज दिया था। कुछ लोगों को पॉलीटेक्निक में बनी अस्थायी जेल में रखा गया था। करीब पखवारे भर बाद लोगों को छोड़ा गया था।
संघ से जुड़े रहे मुरलीधर केसरवानी बताते हैं कि छह दिसंबर 1992 से पहले प्रतापगढ़ से बड़ी संख्या में लोग कारसेवा के लिए अयोध्या गए थे। अयोध्या में भीड़ अधिक होने के कारण लोगों को बसों से लौटा दिया गया। इस बीच उन्मादी भीड़ ने वहां विवादित ढांचा गिरा दिया। इसके बाद पुलिस ने उनके साथ अधिवक्ता अर्जुन सिंह, स्व. रामअवतार खंडेलवाल, स्व. हीरालाल दूबे समेत करीब 154 लोगों को पकड़ लिया। सभी को पहले पालीटेक्निक में बनी अस्थायी जेल में रखा गया। बाद में सभी को नैनी जेल भेज दिया गया। 13 दिन नैनी जेल में रखने के बाद सभी को छोड़ा गया। संघ से ही जुड़े बुजुर्ग अधिवक्ता राममूर्ति तिवारी रामजन्म भूमि चबूतरा निर्माण में शामिल हुए थे। छह दिसंबर को यहां से वह लोग जा रहे थे। तभी विवादित ढांचा गिराए जाने का शोर मच गया। इस दौरान पुलिस ने उनके साथ तमाम अन्य लोगों को पकड़कर पालीटेक्रिक में बनी अस्थायी जेल भेज दिया। जिले से अलग-अलग जगहों से एक हजार से भी अधिक लोग गिरफ्तार हुए थे। पुलिस विहिप के साथ ही संघ से जुड़े कार्यकर्ताओं को ढूंढ रही थी। उन्हें खोज-खोजकर पकड़ा जा रहा था। उन्हें अलग-अलग जेलों में रखा गया था। करीब पखवारे भर बाद सभी को छोड़ा गया। कारसेवा में भी यहां से हजारों लोग गए थे। बाद में सभी को रोका गया। सूचना आई कि अब वहां से किसी को न भेजिए। यहां तक कि कारसेवकों के लिए राशन भेजने की भी मनाही कर दी गई। कहा गया कि अयोध्या में भीड़ अधिक होने के कारण खाना बनाने के लिए भी जगह नहीं है। ऐसे में उन्हें पकाकर भोजन दिया जाए।