मंदिरों में प्रसाद बेचने वालों के लिए भी अब खाद्य लाइसेंस अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए भारतीय खाद्य संरक्षण एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने चार फरवरी तक की समय सीमा तय की है।
इस तिथि तक लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन न होने पर संबंधित व्यापारियों पर जुर्माना लगाया जाएगा। एफएसएसएआई के चेयरमैन के. चंद्रमौली ने सोमवार को मंडलीय सभागार में समीक्षा बैठक के दौरान यह जानकारी दी।
बताया कि खाद्य विक्रेताओं की सहूलियत के लिए लाइसेंस लेने और रजिस्ट्रेशन कराने की व्यवस्था 11 दिसंबर से आनलाइन की जा रही है।
पहले चरण में हापुड़, गाजियाबाद, लखनऊ और गौतम बुद्ध नगर, जबकि दूसरे चरण में वाराणसी समेत अन्य जिलों में यह सुविधा शुरू होगी।
समीक्षा बैठक में वाराणसी, इलाहाबाद, आजमगढ़ और विंध्याचल मंडल के न्याय निर्णायक अधिकारी, अभिहित अधिकारी और खाद्य सुरक्षा अधिकारी शामिल थे।
विंध्याचल मंडल की प्रगति ठीक होने पर अन्य मंडल के अधिकारियों को इससे सीख लेने की नसीहत दी। इसी प्रकार मऊ में छह माह के भीतर एक भी खाद्य लाइसेंस जारी नहीं होने पर नाराजगी जताई।
चंदौली के न्याय निर्णायक अधिकारी तिलकधारी से खाद्य पदार्थों में मिलावट की पुष्टि के बाद भी जुर्माना नहीं लगाने की बाबत पूछा और हिदायत दी कि इसमें कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
समीक्षा के बाद पत्र प्रतिनिधियों से बातचीत में चंद्रमौली ने कहा कि धार्मिक नगरी काशी में प्रसाद विक्रेताओं की संख्या अधिक है। अब प्रसाद विक्रेताओं को भी खाद्य लाइसेंस लेना होगा।
उन्होंने बताया कि लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन के कार्यों में व्यापार मंडलों का सहयोग लिया जाएगा ताकि कोई भी खाद्य पदार्थ बिना लाइसेंस के न बिके। बताया कि वाराणसी में फूड स्ट्रीट योजना पर डीएम ने बात की है।
इसे लागू कराने से पहले संबंधित व्यापारियों को हाइजीन की ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्होंने बताया कि लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन के मामले में महाराष्ट्र देश में नंबर एक पर है।
समीक्षा बैठक में मंडलायुक्त चंचल कुमार तिवारी, एफएसएसएआई के सहायक निदेशक संजय गुप्ता, एडीएम सिटी एमपी सिंह, अभिहित अधिकारी हरिशंकर सिंह, मंडलीय खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरपी गुप्ता समेत चारों मंडल के अधिकारी शामिल रहे।