कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं बीच छिड़ी जुबानी जंग और दोनों दलों के रिश्तों में तल्खी का असर कांग्रेस हाईकमान सोनिया गांधी राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली, अमेठी में नजर आने लगा है।
इन दोनों नगरों में अब तीन-चार घंटे की बिजली कटौती शुरू कर दी गई है। हालांकि पावर कार्पोरेशन के चेयरमैन संजीव मित्तल से लेकर कोई भी अधिकारी इस बारे में जुबान खोलने को तैयार नहीं हैं।
लेकिन सूत्रों का कहना है कि शक्ति भवन स्थित नियंत्रण कक्ष के अभियंताओं को बिजली किल्लत के बहाने दूसरे नगरों की तरह रायबरेली-अमेठी में भी कटौती करने के आदेश दे दिए गए हैं।
नियंत्रण कक्ष के अभियंता रायबरेली-अमेठी में निर्धारित शिड्यूल के अनुसार बिजली कटौती की पुष्टि भी कर रहे हैं।
अभी तक रायबरेली व अमेठी प्रदेश के उन नौ बड़े-छोटे शहरों में शामिल था जहां 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही थी।
पिछले साल अगस्त में सोनिया गांधी की सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव से मुलाकात के बाद रायबरेली-अमेठी की बिजली कटौती बंद करके अनवरत आपूर्ति के आदेश दे दिए गए थे।
इस पर सोनिया ने मुलायम का आभार व्यक्त किया था लेकिन अब दोनों दलों के बीच बढ़ रही दूरियों ने फिर वहां के बिजली उपभोक्ताओं को ‘खास’ से ‘आम’ की श्रेणी में खड़ा कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार दो दिन पहले ही राज्य सरकार ने इन दोनों इलाकों में बिजली कटौती के आदेश दे दिए हैं।
बिजली की कमी की दुहाई देते हुए जहां रायबरेली व अमेठी की बत्ती काटी जा रही है, वहीं इटावा, कन्नौज, मैनपुरी, संभल, रामपुर में कटौतीमुक्त आपूर्ति का सिलसिला अब भी जारी है।
पावर कार्पोरेशन के अधिकारियों का कहना है कि बिजली की मांग में एकाएक हुई भारी बढ़ोतरी व मांग में कमी को देखते हुए तात्कालिक रूप से रायबरेली-अमेठी में कटौती की जा रही है।
बिजली की स्थिति में सुधार होते ही कटौती के आदेश वापस ले लिए जाएंगे। दिलचस्प बात यह है कि पावर कार्पोरेशन ने हाईकोर्ट से लेकर राज्य विद्युत नियामक तक के समक्ष दाखिल हलफनामे में रायबरेली व अमेठी को कटौतीमुक्त आपूर्ति किए जाने का उल्लेख कर रखा है।
यह पूरी तरह से राजनीतिक मामला है। यदि कमी के कारण कटौती होनी है तो इसे अन्य शहरों में भी लागू किया जाता। यूपी सरकार राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते आम आदमी को परेशान कर रही है।
अमरनाथ अग्रवाल, प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता