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राजनीतिक दलों के बीच इंटरनेट पर छिड़ी यह कैसी जंग

Thu, 18 Jul 2013 12:06 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो
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दो बड़े राजनीतिक दलों में इंटरनेट पर अनोखी जंग शुरू हो चुकी है। एक-दूसरे के नेताओं की उपलब्धियों का बखान करने के लिए वेबसाइटें बनाई जा रही हैं, हालांकि इनमें कंटेंट शून्य है।
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विशेषज्ञ संभावना जता रहे हैं कि इन्हें विभिन्न पार्टियों के नेट-सैवी समर्थकों ने शुरू किया है। यूपीए और एनडीए के बीच शुरू हुए इस मुकाबले से आम इंटरनेट सर्फर्स को पॉलिटिकल थियेटर में हास्य का पूरा मसाला उपलब्ध हो रहा है।

माना जा रहा है कि शुरुआत विपक्ष के समर्थकों ने करीब दो महीने पहले सत्ताधारी कांग्रेस के प्रमुख युवा नेता की उपलब्धियों को गिनाने का दावा करती वेबसाइट बनाकर की। यह वेबसाइट ब्लैंक पेज खोलती है। इसमें कुछ नहीं लिखा है सिवाय पेज के कोने के, जहां इसकी अंतिम अपडेट की तारीख लिखी जाती है, जो हर रोज अपडेट हो रही है। हालांकि अपडेट होकर भी यह पेज ब्लैंक ही रहता है।
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इसके जवाब में मंगलवार को एक नया पेज सामने आया जो लोकसभा चुनाव में नेतृत्व के लिए तय किए गए भाजपा के प्रमुख नेता पर था। ये प्रधानमंत्री बनने के बाद देश को कैसे चलाएंगे और 2002 के दंगों पर इनका क्या नजरिया है, वेबसाइट पर इसे बताने का दावा किया गया।

इसके लिए ‘व्यू डिटेल्स’ आइकॉन पर क्लिक करने को कहा गया, लेकिन क्लिक करने पर यह आइकॉन कर्सर से दूर भाग जाता है। दरअसल यह बताने का तरीका था कि इन नेता के कोई विचार हैं ही नहीं।

पहले दिन करीब 60 हजार हिट आए। बुधवार को यह वेबसाइट बंद कर दी गई। एक संदेश में बताया गया कि वेबसाइट निर्माता के व्यंग्य पर हुई आपत्तियों के चलते साइट बंद की जा रही है। लोगों से अपील की गई कि वे वेबसाइट निर्माता को फोन कॉल करके तंग करना बंद करें।

दूसरी ओर इसके जवाब में विपक्ष के समर्थकों ने धड़ाधड़ और पेज बना दिए, जिसमें देश में विभिन्न कालखंडों में हुए दंगों और हालिया छपरा मिड-डे मील प्रकरण पर यूपीए के प्लान को बताने का दावा किया गया है। हालांकि यहां भी व्यू डिटेल्स का आइकॉन कर्सर से दूर भाग जाता है।

अमेरिकी चुनाव के तौर-तरीकों का असर
सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव मनोज बडोला कहते हैं कि पिछले वर्ष अमेरिकी चुनावों के दौरान डेमोक्रेट प्रत्याशी बराक ओबामा की पीआर एजेंसी ने उनके प्रतिद्वंद्वी मिट रोमनी पर व्यंग्य करते हुए ऐसी वेबसाइट बनाई थी।

इसमें रोमनी की वित्तीय नीति में 50 खरब डॉलर के टैक्स से राहत दिलाने की बात कही गई थी। यहां भी ‘व्यू डिटेल्स’ उसी तरह प्रतिक्रिया देता है जैसा यूपीए की नीतियां बताती वेबसाइट पर देता है।
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