कलीनगर/पीलीभीत। मथना जपती गांव में सोमवार देर रात मानसिक रूप से अस्वस्थ युवक लापता हो गया। जिस यात्री शेड में वह बैठा था वहां उसकी पैंट, चप्पल पड़ी मिलीं। उसके पास में खून और बाघ के पदचिह्न भी मिले। इससे बाघ के हमले की आशंका जताई गई है। जानकारी के बाद वन विभाग ने तलाशी अभियान शुरू किया, लेकिन मंगलवार शाम तक युवक का कोई सुराग नहीं लग सका।
कलीनगर क्षेत्र के गांव मथना जप्ती माला और महोफ रेंज के जंगल सीमा से सटे इलाके में स्थित है। ग्रामीणों का कहना है कि एक माह पूर्व इलाके में दो मानसिक रूप से अस्वस्थ युवक आ गए थे। दोनों दिन भर घूमने के बाद गांव की सीमा में माधोटांडा-पीलीभीत मार्ग पर गुरुद्वारे के निकट स्थित यात्रीशेड में ठहरते थे।
क्षेत्र के लोग उन्हें कपड़े, खाना आदि दे दिया करते थे। कुछ दिन पूर्व से एक युवक क्षेत्र से चला गया। शेष बचा युवक यात्री शेड में ही रहता था। गांव निवासी सतनाम सिंह ने बताया कि सोमवार रात करीब नौ बजे वह खेत पर सिंचाई कर रहे थे। साथ में भतीजा था। छोटा भाई जंगल के निकट स्थित फार्म पर ट्रैक्टर से गया था।
कुछ देर बाद छोटे भाई ने फोन कर बताया कि बाघ घूम रहा है, खेत से घर चले जाओ। इसपर भतीजे के साथ ट्रैक्टर से घर के लिए आने लगा। मुख्यमार्ग पर गुरुद्वारे के पास एक पैंट पड़ी थी। उसके पास बाघ के पैरों और घसीटने के निशान थे। बताया कि खेत पर जाने से एक घंटा पूर्व यात्री शेड पर एक अज्ञात व्यक्ति को देखा था।
इसको ध्यान में रखते हुए वह यात्री शेड के पास पहुंचा तो वहां चप्पलें पड़ी मिलीं। उन्होंने इसकी जानकारी वन विभाग को दी। रात को ही रेंजर रोबिन सिंह मौके पर पहुंचे। डीएफओ मनीष सिंह ने भी पहुंचकर स्थिति को परखा। मंगलवार शाम तक तलाशी अभियान जारी रहा, लेकिन युवक का कोई सुराग नहीं लग सका।
स्पीकर न बजाते तो ट्रैक्टर से खींच ले जाता बाघ
सतनाम सिंह ने बताया कि जानकारी के बाद वन विभाग की टीम जब मौके पर पहुंची तो वह ट्रैक्टर से घर लौटने लगा। इस दौरान रास्ते में अचानक सामने बाघ सामने आ गया, लेकिन ट्रैक्टर पर लगे स्पीकर से तेज आवाज में गाने बजने के कारण वह पीछे लौट गया।
बाघ की चहलकदमी से नाराज किसानों ने की नारेबाजी
मथना क्षेत्र में बाघ की लगातार चहलकदमी से नाराज किसानों ने मंगलवार सुबह माधोटांडा-पीलीभीत मार्ग पर वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों का कहना था कि इस क्षेत्र में विभाग की ओर से जाल फेंसिंग तो करा दी गई, लेकिन कई स्थानों पर गेट लगाने के लिए जगह खुली छोड़ दी गई। जिसकी वजह से बाघ बाहर निकल रहे हैं। सोमवार रात हुई घटना के बाद बाघ के पदचिह्न मिटाने का भी विभाग पर आरोप लगाया।
जानकारी के बाद मौका मुआयना कर स्थिति को परखा गया। ग्रामीणों द्वारा बताए अनुसार तलाशी भी कराई जा रही है। अभी घटना को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं कहा जा सकता।
- मनीष सिंह, डीएफओ
वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते ग्रामीण।स्रोत:ग्रामीण
वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते ग्रामीण।स्रोत:ग्रामीण