पीलीभीत के जिला चिकित्सालय के ट्रामा सेंटर में मरीज देखते चिकित्सक संजीव सक्सेना।संवाद
पीलीभीत। मोबाइल फोन व लैपटॉप का अधिक प्रयोग, बाइक चलाने और काफी देर तक बैठकर कार्य करने की वजह से युवा वर्ग भी सर्वाइकल की जद में आ रहा है। बैठने व लेटने में काफी दिक्कत हो रही है। सर्वाइकल से पीड़ित 10 से 15 युवा रोजाना जिला अस्पताल पहुंच रहे है। चिकित्सक सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
जिला अस्पताल के हड्डी रोग कक्ष में रोजाना 60-70 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इसमें जोड़ों के साथ ही सर्वाइकल की समस्या से पीड़ित मरीज शामिल हैं। लगभग 10 से 15 युवा भी सर्वाइकल की समस्या से परेशान होकर अस्पताल पहुंचते हैं।
जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव सक्सेना ने बताया कि युवा वर्ग दिन भर मोबाइल व लैपटॉप से ही चिपके रहते है। सोशल नेटवर्किंग साइट के प्रति उनका रुझान ज्यादा है। घंटों मोबाइल फोन, लैपटॉप देखते रहने से सीधे बैठ पाना संभव नहीं हो पाता। ऐसे में गर्दन में झुकाव व टेढ़ी होने से मांसपेशियों में खिंचाव आता है।
धीरे-धीरे गर्दन की हड्डियों में बदलाव होने से यह शाखाएं दबने लगती हैं। इससे जहां तक नसें जाती हैं, वहां समस्याएं होने लगती है। इससे गर्दन के पीछे हड्डी में दर्द होना, शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द होने के साथ ही सुन्नपन की समस्या होने लगती है।
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ऐसे करें बचाव
- तकिया का इस्तेमाल कम से कम करें
- नियमित व्यायाम करें
- आउटडोर गेम खेलें
- कुर्सी पर सीधे बैठें
- रीढ़ की हड्डी सीधी रखें
- बैठते समय गर्दन न झुकाएं