सामाजिक, साहित्यिक व शैक्षिक संस्था ‘पहला कदम’ की ओर से हुई शेरी नशिस्त कार्यक्रम में शायरों ने अपने कलाम से समां बांध दिया। श्रोताओं ने भी शायरों को जमकर दाद दी।
शहर के मोहल्ला फीलखाना मेें सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य लईक खान कामिल के आवास पर मंगलवार देर शाम हुई नशिस्त में शायर चांद पीलीभीती ने कहा : प्यार का हक मांगते हो पत्थरों के शहर में,
कौन देगा आंसुओं के दाम अपने घर चलो।
अशरफ जमा काविश ने पढ़ा :
चीरकर सीना जमीं का रिज्क अपना पा लिया,
देखकर सूरज भी है दहशतजदा मजदूर से।
हाशिम नाज ने कलाम पढ़ते हुए कहा :
हमें देखो तुम्हें अपनी पड़ी है,
गरीबी हाथ फैलाए खड़ी है।
फुरकान हाशमी ने कहा :
तुम जो खुलूस-ओ-प्यार वफा का सुबूत दो,
दुनियां में नफरतों के जनाजे निकल पड़ें।
सरकार नियाजी असर ने पढ़ा :
देखकर सारे जमाने को असर इबरत हो,
दाग दामन के अभी तक न धुलाए हमने।
मुजीब साहिल ने कहा :
बहुत मजबूत रिश्ते भी तो अक्सर टूट जाते हैं,
दिलों पे चोट लगने से सिकंदर टूट जाते हैं।
जियाउद्दीन जिया ने कहा :
कितने बेटे बेटियां एक मां ने पाल दीं,
एक मां का पालना क्यों अजाब हो गया।
जीतेश राज नक्श ने कुछ यूं कहा :
सबके सब ही बदगुमां हैं और मैं खामोश हूं,
हर तरफ सरगोशियां हैं और मैं खामोश हूं।
कमर पीलीभीती ने पढ़ा :
हर जिंदगी उदास है जिंदादिली कहां,
यह दौरे मुफलिसी है लबों पर हंसी कहां।
इरफान सागर ने कहा :
खुद्दारियों से अपनी बगावत न कर सका,
फिर भी जमीर की मैं हिफाजत न कर सका।
शराफत हुसैन शाद ने अपना कलाम यूं पेश किया
अजब मीठी जुबां है प्यार से रहना सिखाती है,
इसी बाइस है शैदाई हर इक इंसान उर्दू का।
लईक खान कामिल ने कहा :
तल्ख लहजा भी जरूरी है खुद की बका के लिए,
गर मीठा होता समंदर कब का लोग पी चुके होते।
निजामत कर रहे उसमान खां रजी ने कहा :
जिंदगी किसलिए अधूरी है,
ये समझना बहुत जरूरी है।
सदारत करते हुए ईमान नकवी ने कहा :
नजर से बचके वो कल्ब-ओ-जिगर से गुजरे हैं,
जरा ख्याल तो कीजे किधर से गुजरे हैं।
असलम वारसी ने कलाम पेश किया। समापन पर मो. दानिश खां ने संस्था के कार्यक्रमों पर रोशनी डाली। इस मौके पर आसिफ खान, जावेद अंसारी, अजमल खान, मजहर खान, मोईनउद्दीन खान, जफर, अकरम खान समेत कई लोग मौजूद रहे।