नौजल्हा क्षेत्र में नोमैंस लैंड के निकट कराए जा रहे कार्य। संवाद
कलीनगर। भारत-नेपाल सीमा से सटे नौजल्हा नंबर-दो क्षेत्र में शारदा नदी के संभावित खतरे को लेकर ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि नेपाल के सिंचाई विभाग ने अपने बाढ़ सुरक्षा कार्यों के दौरान नोमैंस लैंड से सटे करीब 50 से 60 मीटर हिस्से को छोड़ दिया है। वहीं, भारतीय क्षेत्र में चल रहे बाढ़ सुरक्षा कार्यों में भी इस संवेदनशील हिस्से को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है।
कलीनगर तहसील के तराई इलाके में पिछले वर्ष शारदा नदी ने दाहिने किनारे की ओर कटान कर भारतीय क्षेत्र और तटबंध को नुकसान पहुंचाया था। नेपाल की ओर से अपने क्षेत्र में मजबूत तटबंध बनाने का कार्य किया गया। नोमैंस लैंड से सटे कुछ इलाकों को खाली छोड़ दिया गया। इससे नौजल्हा नंबर दो क्षेत्र में बाढ़ का खतरा बढ़ गया। ग्रामीणों का कहना था कि नेपाल क्षेत्र में ठोस कार्य होने और नोमैंस लैंड से सटे कुछ इलाके को खाली छोड़ने से खतरा और बढ़ गया। नदी की धार उस हिस्से में टकराकर भारतीय क्षेत्र को प्रभावित करेगी। इसको लेकर ग्रामीणों ने धरना प्रदर्शन भी किए थे। विरोध के बाद जिला प्रशासन और विधायक के प्रयास के बाद शासन ने दो करोड़ रुपये की परियोजना को स्वीकृति दी।
इधर, ग्रामीणों का कहना है कि नदी का बहाव नेपाल की ओर से तेज आता है। ऐसे में यदि नोमैंस लैंड के छोड़े गए हिस्से को सुरक्षित नहीं किया गया तो बाढ़ का पानी नए बनाए जा रहे सुरक्षा कार्यों के पीछे से होकर भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर सकता है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों को कई बार इस संबंध में अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। निर्माण कार्य की रफ्तार भी धीमी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मौके का निरीक्षण कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है।
एसडीएम प्रमेश कुमार ने बताया कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों से इस संबंध में बातचीत कर जरूरी निर्देश दिए जाएंगे। संवाद