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Pilibhit News: 'रेशम की डोर' से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहीं महिलाएं, प्रतिमाह कमाती हैं इतने रुपये

Tue, 22 Jul 2025 04:33 PM IST
मुकेश कुमार जितेंद्र अवस्थी, संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत

सार

पीलीभीत में रेशम का धागा बनाकर महिलाएं अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में जुटी हैं। शहर के सहायक निदेशक रेशम कार्यालय परिसर में धागा उत्पादन यूनिट है। यहां 15 से 20 महिलाएं रेशम का धागा तैयार करती हैं। 
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रेशम का धागा तैयार करतीं महिलाएं - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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पीलीभीत में रेशम की डोर (धागा) से 15 से 20 महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। धागा बनाकर यह महिलाएं प्रतिमाह आठ से 10 हजार रुपये कमा रही हैं। कच्चा माल रेशम विभाग की ओर से मुहैया कराया जाता है। धागे की बिक्री से मिलने वाले मुनाफे से महिलाओं की आय होती है।

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शहर के सहायक निदेशक रेशम कार्यालय परिसर में धागा उत्पादन की यूनिट है। इसमें रेशम के कोये से धागा बनाया जाता है। धागा बनाने की जिम्मेदारी महिलाएं संभाल रही हैं। इस यूनिट में 15 से 20 महिलाएं काम करती हैं। रोजाना यह महिलाएं सुबह 10 बजे आती हैं और शाम चार से पांच बजे तक धागा तैयार करती हैं। 

धागा बनाने की प्रक्रिया चार चरणों में पूरी की जाती है। सबसे पहले कोये को उबाला जाता है। इसके बाद अलग-अलग मशीनों से धागे को तैयार किया जाता है। यूनिट में काम करने वाली ज्योति सिंह ने बताया कि धागा के दो-दो किलो के बंडल बनाकर रखती हैं।
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एक कोये से बनता एक हजार मीटर धागा
सहायक निदेशक रेशम दयाशंकर ने बताया कि जिले में ही रेशम का उत्पादन करने वालों से कच्चा माल खरीदा जाता है। यूनिट में काम करने वाली महिलाएं धागा बनाती हैं। एक कोये में करीब एक हजार मीटर धागा तैयार होता है। आर्डर मिलने पर इसकी बिक्री की जाती है।

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कीमत 3800 से चार हजार रुपये किलो
सहायक निदेशक ने बताया कि आर्डर के हिसाब से धागा बनारस और मुबारकपुर भेजा जाता है। इस समय धागे की कीमत प्रति किलो 3800 से चार हजार रुपये है। यूनिट में प्रतिमाह 10 से 15 किलो धागा तैयार किया जाता है। अभी कुछ दिन पहले करीब ढाई क्विंटल धागे की बिक्री की गई है। बताया कि बिक्री से जो मुनाफा मिलता है। उसे महिलाओं में बांट दिया जाता है।

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