सूफी संत हजरत मखदूम अली अहमद साबिर कलयरी की याद में चल रहे जश्ने साबिर-ए-पाक का मंगलवार को रंग की रस्म के साथ समापन हो गया। इससे पूर्व कुलशरीफ की रस्म अदा की गई।
शहर में पिछले 18 वर्षों से जश्ने साबिर-ए-पाक का सिलसिला जारी है। सोमवार रात साबिरे पाक की दरगाह के सज्जादानशीन हजरत मंसूर एजाज साबिरी की सरपरस्ती व दरगाह कबीरउल औलिया के सज्जादा निसार अहमद उस्मानी कलंदरी की सदारत में कव्वाल पार्टियों ने अपने कलाम पेश किए।
इधर, मंगलवार सुबह करीब नौ बले महफिले शमा की आगाज कव्वाल पार्टियों ने अपने कलाम से किया। मीलाद पार्टियों ने हम्द, नात मनकबत पेश की। करीब एक बजे हस्बे रिवायत कुलशरीफ हुआ। जिसमें सज्जादानशीन हजरत मंसूर एजाज साबिरी ने साबिरे पाक की सीरत पर रोशनी डाली और आवाम को हजरत साबिरे पाक के बताए हुए उसूलों पर चलने की हिदायत दी। कहा कि साबिरे पाक के प्रति सच्ची आस्था, अकीदत व मोहब्बत तभी होगी जब हम उनके बताए हुए रास्ते को अपनी जीवनशैली में ढालें। सज्जादा निसार अहमद उस्मानी ने मुल्क व कौम की तरक्की के लिए दुआ फरमाई।
इस मौके पर दिलफिरोज अहमद फरीदी, फाजिल हुसैन साबिरी, मंसूर अहमद शम्सी, एम जमीर मंसूरी, जियाउर्रहमान रज्जू, शाहबुदद्ीन, अकरम, हाफिज अनस, हाफिज फुरकान, हाजी फरहान साबिरी, इकबाल हजरत खां, मोईन खां, आरिफ हजरत खां, शाहिद मियां, शाकिर मियां आदि ने शिरकत की।