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दूसरे दिन खाली हाथ लौटे शौकीन, अब महंगी ही मिलेगी शराब

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पीलीभीत। 43 दिन के लॉकडाउन के बाद शराब की दुकानें जब खुलीं तो पहले ही दिन सोमवार को ज्यादातर दुकानदारों ने अपना हिसाब किताब सही करके स्टॉक खत्म होना दिखा दिया। पिछले दिनों चोरी-छिपे बेची गई बोतलें एक दिन के हिसाब में दिखा दीं। बोतलें तो पहले ही नाममात्र की बची थीं, जो सोमवार को बिक गई। मंगलवार को अधिकतर दुकानें कुछ देर खुलने के बाद इसी कारण बंद हो गईं। अब नए सत्र में ज्यादा मूल्य पर आने वाली बोतलें ही मिल पाएंगी।
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जनपद में अंग्रेजी शराब की 35, देसी शराब की 213 और बीयर की 18 दुुकानें हैं। इसके अलावा माधोटांडा रोड पर मॉडलशॉप है। लॉकडाउन में कहने के लिए तो अब तक शराब की सभी दुकानें बंद थीं। मगर इन दुकानों से शराब की कालाबाजारी होती रही। इसके चलते दुकानों में स्टॉक पहले ही नाममात्र का रह गया था। मगर, लॉकडाउन के तीसरे चरण की शुरुआत के पहले दिन ही शासन ने शराब की दुकान खोलने की हरी झंडी दे दी। इसके बाद प्रशासन की पहल पर शराब की दुकानों को सोमवार को खोला गया था। इस दिन सुबह 10 बजे जैसे ही शराब की दुकानें खुलीं तो शौकीनों की भीड़ जुट गई। सड़क पर लंबी दूरी की लाइन लगाकर उन लोगों ने बड़ी मात्रा में शराब खरीदकर उसे स्टॉक कर लिया। कुछ दुकानों पर शाम सात बजे तक शराब बिकी।
मगर, मंगलवार को जब दुकानें खुलीं तो उन पर बोतलें थी ही नहीं। दुकानदारों का कहना था कि उनके पास शराब का स्टॉक नहीं बचा। आबकारी विभाग की मानें तो एक दिन में जनपद में लगभग दो करोड़ रुपये की शराब बिक गई। मंगलवार को दुकानें कुछ देर खुलने के बाद ही बंद हो गई क्योंकि उनके पास स्टॉक ही नहीं बचा था। शहर के गैस चौराहा और आवास विकास चौराहा समेत कुछ स्थानों पर दुकानें खुली थीं, मगर, वहां शराब खरीदने के लिए भीड़ नहीं थी क्योंकि दुकानों पर अंग्रेजी और देसी का स्टॉक खत्म हो चुका था। कुछ महंगे ब्रांड की ही बोतलें दुकान पर थीं, मगर उनके खरीदार नहीं थे।
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बंद दुकानों से पहले ही निकल गया स्टॉक
लॉकडाउन के दौरान भले शराब की बिक्री पर प्रतिबंध रहा हो, मगर शराब की बिक्री पिछले गेट से तय रेट से दो से तीन गुने तक ज्यादा दामों पर होती रही। दुकानों से शराब की बोतलें पहले माफिया ने घरों में स्टॉक की। वहां से उन्हें निकालकर तीन गुना दामों पर बेचा गया। शुरूआत में आबकारी विभाग के अधिकारी इसे नजरंदाज किए रहे या शराब माफिया को जानबूझकर कालाबाजारी की छूट दिए रहे। मगर, उसके बाद डीएम वैैभव श्रीवास्तव ने बंद दुकानों को खुलवाकर उनका सत्यापन शुरू करा दिया। इसमें स्टॉक की गड़बड़ी खुलकर सामने आ गई। बीसलपुर, पूरनपुर ही नहीं, शहर की दुकानों के स्टॉक में भी गड़बड़ी निकली। इनमें अभिलेख अधूरे मिले। दुकानों पर शराब की बोतलें कम थीं। एक दुकान तो पूरी तरह से खाली हो गई थीं। इन दुकानदारों पर अभी ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
पुराना स्टॉक बेचने को सात दिन
शासन ने शराब के ठेकेदारों को पुराना स्टॉक बेचने के लिए सात दिन का समय दिया है क्योंकि 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के बाद लॉकडाउन लग गया था। उसमें ठेकेदारों को पुराने वित्तीय वर्ष के बचे नौ दिन में नुकसान उठाना पड़ा। अब सरकार ने सात दिन तक पुराना स्टॉक निकालने का समय तय किया है। माना जा रहा है कि दुकानदारों के लिखा पढ़ी में हुए नुकसान को इसी में व्यवस्थित किया जाएगा। हालांकि वह अलग बात है कि पुराने स्टॉक की शराब लॉकडाउन में ही बेच दी गई तो अब दुकानदारों के पास पुराना स्टॉक बचा नहीं है। प्रत्येक वित्तीय वर्ष में शराब की दुकानों की नीलामी 31 मार्च तक के लिए होती है।
दोबारा न बंद हो जाए दुकान, शौकीनों ने कर लिए इंतजाम
दुकानों पर भले ही स्टॉक खत्म हो गया, मगर शराब के शौकीनों ने लॉकडाउन पार्ट तीन में इस दिक्कत से बचने के लिए आगे तक पूरा इंतजाम कर डाला। तमाम शौकीनों ने कई दिन का स्टॉक लगा लिया, ताकि अगर लॉकडाउन लंबा खिंचे तो उन्हें पीने में दिक्कत न आए।
सोमवार को पहले दिन शराब की बिक्री अधिक हुई। इसीलिए दूसरे दिन अधिकतर दुकानों पर स्टॉक खत्म हो गया था। नया स्टॉक भी लगातार आ रहा है। शराब की कुछ गाड़ियां गोदाम में पहुंच चुकी हैं, बाकी रास्ते में हैं। नए सत्र से दुकानों पर नया स्टॉक उपलब्ध करा दिया जाएगा। - शैलेंद्र सिंह, आबकारी निरीक्षक
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