विचरण करता हाथियों का झुंड। फाइल फोटो
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पीलीभीत। पीटीआर, दुधवा और कतर्निया घाट के जंगल को मिलाकर देश का 33वां एलिफैंट रिजर्व बनाया जाएगा। शनिवार को केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को ट्वीट कर नए एलिफैंट रिजर्व की जानकारी दी। यह देश का 33वां एलिफैंट रिजर्व होगा। इसके लिए पीलीभीत के 73हजार हेक्टेयर जंगल का हिस्सा लिया जाएगा।
तराई के जंगलों में बाघ, तेंदुए के साथ अब हाथियों का संरक्षण भी हो सकेगा। केंद्र सरकार ने तराई हाथी अभ्यारण्य बनाने की मंजूरी दे दी है। केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व की सीमा नेपाल की सीमा से जुड़ी हुई है। पीटीआर की बराही रेंज का जंगल नेपाल की शुक्लाफांटा सेंचुरी से लगा हुआ है। खुली सीमा होने के चलते यहां वन्यजीवों की आमद होती रहती है। बराही रेंज का शारदा पार से लेकर दुधवा टाइगर रिजर्व की सीमा तक का हिस्सा हाथियों का कॉरिडोर माना जाता है। वर्षों से नेपाल के हाथी यहां आकर विचरण करते हैं। समय के साथ-साथ कॉरिडोर नष्ट होता चला गया और जंगल खेतों में तब्दील होते चले गए। इससे हाथियों का भी स्वभाव बदल गया। नेपाल के हाथी पूर्व की तरह हर साल यहां आते हैं और फसलों को नष्ट कर देते हैं। हर साल सैकड़ों बीघा फसल को यह हाथी तहस-नहस कर देते हैं। इस मामले की रिपोर्ट प्रदेश व केंद्र सरकार को भी भेजी गई थी। वन्यजीव विशेषज्ञों ने कई साल अध्ययन करने के बाद हाथियों का कॉरिडोर विकसित करने का सुझाव दिया। इसके बाद केंद्र सरकार ने पीटीआर और दुधवा टाइगर रिजर्व के बीच हाथी अभ्यारण्य केंद्र बनाने की सहमति दे दी। शनिवार को केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने ट्वीट कर इसकी आधिकारिक सूचना भी दे दी। यह भारत का 33वां हाथी अभ्यारण्य होगा।
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प्रदेश का दूसरा एलिफैंट रिजर्व होगा
पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने बताया कि तीन लाख हेक्टेयर क्षेत्र में तराई एलिफैंट रिजर्व को विकसित किया जाएगा। इसमें पीलीभीत टाइगर रिजर्व के अलावा दुधवा व बहराइच करतनिया रिजर्व का हिस्सा शामिल होगा। पीलीभीत का 73 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल इसमें शामिल होगा। इसके साथ ही जंगलों में हाथियों के लिए बांस और गन्ने की खेती कराई जाएगी। प्रदेश में यह दूसरा एलिफैंट रिजर्व होगा। पहला एलिफैंट रिजर्व सहारनपुर में शिवालिक है।
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शुक्ला फांटा सेंचुरी से लग्गा-भग्गा क्षेत्र में आते-जाते हैं हाथी
वर्तमान में हाथी नेपाल की शुक्ला फांटा सेंचुरी से निकलकर पीटीआर की बराही रेंज में शारदा पार लग्गा-भग्गा के जंगल में डेरा जमाए हुए हैं। देहरादून वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञ विपुल मौर्य ने बताया कि हाथी अपने रास्ते पर ही चलते हैं। जिस रास्ते से आते हैं उसी रास्ते से लौट जाते हैं। चूंकि कॉरिडोर नहीं है, जमीनों पर खेती हो गई है इसलिए हाथी रास्ते में पड़ने वाले खेतों को उजाड़ता हुआ जाता है। अब एलिफैंट रिजर्व को मंजूरी मिलने से हाथियों का बेहतर संरक्षण होगा व उनको विचरण के लिए पर्याप्त जगह मिल सकेगी।