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घटनास्थल के आसपास मंडराते रहे दोनों बाघ

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बीसलपुर। दियोरिया जंगल में रविवार रात जिस स्थान पर घटना हुई थी। उसी स्थान पर मंगलवार सुबह दो बाघ चहलकदमी करते देखे गए। जंगल से गुजरे एक बाइक सवार ने घटनास्थल के पास बाघ होने की जानकारी बैरियर पर मौजूद वनकर्मी को दी।
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शाहजहांपुर के थाना बंडा के गांव नवदिया बंकी निवासी अमरीक सिंह मंगलवार सुबह करीब पांच बजे कार द्वारा घुंघचाई की ओर से दियोरिया जा रहे थे। अमरीक सिंह के मुताबिक जिस स्थान पर बाघों ने युवकों को मारा था, उससे कुछ ही दूरी पर सड़क के किनारे दोनों बाघ घूमते देखे गए। कार में सुरक्षित होने के बावजूद अमरीक सिंह बाघों को देखकर डर गए और बिना देरी किए चुपचाप कार से दियोरियों की ओर निकल गए। मंगलवार दोपहर 12 बजे के आसपास बीसलपुर तहसील का एक कर्मचारी बाइक से घुंघचाई की ओर से दियोरिया की ओर आ रहा था। बताते हैं कि उसने भी उसी स्थान पर बाघों को देखा। बाघों को देख उसने बाइक भगाकर जंगल को पार किया। तहसील कर्मचारी ने दियोरिया जंगल सीमा पर स्थित बैरियर पर वनकर्मी अरुण कुमार को बाघ होने की जानकारी दी। वनकर्मी अरुण कुमार ने इसकी जानकारी विभागीय उच्चाधिकारियों को दे दी है।
जंगल सीमा के बैरियरों पर दिखी सख्ती
दियोरिया-घुंघचाई वन मार्ग पर सोमवार रात बाघ हमले में दो युवकों की मौत के बाद पीटीआर के अफसरों के निर्देश के बाद दियोरिया जंगल सीमा के दोनों तरफ बैरियरों पर सख्ती कर दी गई। दियोरिया रेंज के रेंजर वीके गुप्ता ने बताया कि दोनों बैरियर पर तैनात वन कर्मियों को शाम आठ बजे के बाद वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। दिन में चौपहिया वाहनों को अकेले जाने और दोपहिया वाहनों को समूह में जाने पर ही छूट दी जा रही है। हालांकि मंगलवार को इस जंगल मार्ग से रोज की अपेक्षा कम वाहन ही गुजरे।
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गांव में दूसरे दिन पसरा रहा सन्नाटा, बाघ हमले की पूरे दिन होती रही चर्चा
दियोरिया जंगल में बाघ हमले का शिकार हुए युवकों की मौत के दूसरे दिन भी गांव में सन्नाटा पसरा रहा। गांव की गलियों और घरों में बाघ हमला ही चर्चा का विषय बना रहा। वहीं पोस्टमार्टम के बाद सोमवार शाम बाघ हमले का शिकार हुए युवकों के शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
गांव दियोरिया निवासी भगवान दास के अविवाहित पुत्र सोनू और हेतराम के पुत्र कंधई लाल को रविवार रात दियोरिया जंगल में उस समय बाघों ने हमलाकर मार दिया। उनका तीसरा साथी दियोरिया निवासी विकास पेड़ पर चढ़कर खुद को बचाया। पुलिस ने सोमवार को ही पोस्टमार्टम कराने के बाद दोनों युवकों के शवों को उनके परिजनों को सौंप दिया था। सोमवार शाम ही गमगीन माहौल में शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इधर मंगलवार को भी गांव में सन्नाटा पसरा रहा। गांव में सार्वजनिक स्थानों पर बैठे बुजुर्ग और युवा बाघ हमले की चर्चा करते देखे गए। ग्रामीणों के मुताबिक दोनों मृतकों के घरों की माली हालत ठीक नहीं है। मजदूरी करके अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। मृतक कंधई लाल, सोनू और विकास पंजाब में मजदूरी करते थे। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान यह तीनों गांव वापस आ गए थे। तीनों सोमवार को हरियाणा जाने की तैयारी में थे। हरियाणा जाने से पहले कंधईलाल अपनी ससुराल वालों से मिलने चला गया और लौटते समय यह हादसा हो गया। ग्रामीणों का कहना था कि उनका गांव जंगल से सटा जरूर है, मगर आज तक कभी भी ऐसा हादसा नहीं हुआ। इस तरह का हादसा पहली बार हुआ है।
वन विभाग बड़े बेटे को दे नौकरी
बाघ हमले में मारे गए सोनू के पिता भगवानदास का कुछ साल पहले निधन हो चुका है। सोनू की मां रामवती ने बताया कि उनके परिवार में सोनू ही काम करने वाला था। सोनू की कमाई से घर चलता था। अब सोनू की मौत के बाद उनके सामने रोजी रोटी का संकट है। वन विभाग उनके बड़े पुत्र श्रीकृष्ण को चतुर्थ श्रेणी के पद पर नौकरी दें तो घर चलता रहेगा, वरना बिखर जाएगा।
प्रशासन करे मदद
बाघ हमले का शिकार हुए कंधई लाल के पिता हेतराम का कहना है कि कंधई लाल की मौत के बाद उसका परिवार पूरी तरह बेसहारा हो गया है। कंधई लाल ने अपने चारों बच्चों में से किसी की शादी भी नहीं कर पाया था। प्रशासन यदि उन्हें पट्टे की जमीन मुहैया करा दें तो परिवार का गुजारा हो सकता है।
मौत के मुंह से बचकर आए विकास को देखने वालों का लगा तांता
घटना में मौत के मुंह से निकलकर आए दियोरिया निवासी विकास की हालत में दूसरे दिन सुधार देखा गया। विकास के घर गांव के अलावा आसपास के गांवों के लोग उसका हाल जानने को पहुंचते देखे गए। विकास ने बताया कि थकान होने के बाद भी उसे रात को नींद नहीं आई। रिश्ते के भाई और चाचा की मौत का मंजर अभी भी बार-बार आंखों के सामने आ रहा है।
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