नोट बंदी के एक दिन से बैंकं बड़े नोट जमा कर छोटे नोट दे रही हैं। कम संख्या में ही सही लेकिन अब करोड़ों रुपये के छोटे नोट बैंक से बाहर आ चुके हैं लेकिन हैरानी की बात यह है नौ दिन बाद भी बैंकों में जमा होने के लिए छोटे नोट नहीं पहुंच रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर बैंकों से निकले छोटे नोट कहां जा रहे हैं। यहीं बाजार से घूमकर यह नोट पुन: बैंक पहुंचने लगते को समस्या काफी हद तक सुधर सकती है।
बड़े नोट बंद होने के बाद से चिकित्सकीय कार्य से जुड़े व्यवसाय जैसे अस्पताल, पैथालॉजी लैब, मेडिकल स्टोर आदि पर इलाज, जांच और दवा बिक्री के लाखों रुपये आ रहे हैं। शहर में दर्जनों अस्पताल, लैब व मेडिकल स्टोर हैं। इसी प्रकार सराफा, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कपड़ा व किराना स्टोर्स की बिक्री लाखों में न सही हजारों में हैं। दूसरी और पैट्रोलपंपों पर भी पांच सौ से कम तेल लेने पर छोटे नोट ही देने पड़ रहे हैं। इस प्रकार पेट्रोल पंपों पर भी प्रतिदिन लाखों रुपये की छोटी नकदी पहुंच ही है। हालात यह है कि 18-19 सौ रुपये का बिल होने पर ही दो हजार का नोट देकर सौ रुपये वापसी की जा रही है। इसके बाद भी व्यापारियों के पास पहुंच रही छोटी नकदी बैंकों में जमा नहीं हो रही है। बैंक से लगातार छोटे नोटों के निकलते रहने और बैंक में इनके वापस न पहुंचने से भी छोटे नोटों का कृत्रिम संकट बना हुआ है। यदि व्यापारी प्रतिदिन की बिक्री के बाद प्राप्त छोटे नोटों में आधे भी बैंकों में जमा करना शुरू कर दें तो समस्या काफी हद कम हो सकती है।
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पूरनपुर बीओबी प्रबंधक से सबक लें बैंक
नौ दिन से लगातार नोटों के निकलने और वापस न आने से बैंक खाली हो रहे हैं। मुख्यालय ने करेंसी न आने की समस्या पर पूरनपुर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा के शाखा प्रबंधक ने मनोज झा ने अनूठी पहल की है। शाम को बाजार में भ्रमण कर वह व्यापारियों से छोटे नोट बैंक में जमा करने की अपील कर रहे है। इसमें पहले दिन चार लाख, दूसरे दिन छह और बुधवार शाम को 10 लाख रुपये की नकदी बैंक में जमा हुई।