जिले में गेहूं की खरीद में एफसीआई ने अड़ंगा लगा दिया है। खरीदे गए गेहूं का उतार यह कहकर मना कर दिया गया कि बोरों की सिलाई हाथ से नहीं मशीन की जानी चाहिए। उतार बंद होने से खरीद भी प्रभावित हो रही है। वहीं मंडी से बीज के नाम पर गेहूं खरीदकर अवैध भंडारण किया जा रहा है।
जिले में गेहूं खरीद को 144 क्रय केंद्र खोले गए हैं। अब तक लगभग 4700 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है। इसमें पीसीएफ सहित कई एजेंसियों पर काफी कम खरीद हुई है। डीएम ने इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए खरीद बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उधर बुधवार को एफसीआई गेहूं उतार में यह कहकर रोक लगा दी कि बोरों की सिलाई मशीन से जानी चाहिए। उतार बंद होने से एजेंसियों पर खरीद प्रभावित हो गई।
केंद्र प्रभारियों का कहना था कि दूर दराज क्षेत्र में बिजली व जनरेटर आदि की व्यवस्था नहीं है ऐसे में बोरों की सिलाई मशीन से नहीं हो सकती। उतार बंद होने की जानकारी पर डीएम ने डिप्टी आरएमओ व एससीआई के प्रबंधक से बात की। डीएम के हस्तक्षेप के बाद शहर व नगर क्षेत्र से जुड़े क्रय केंद्र प्रभारियों ने मशीन से सिलाई पर सहमति व्यक्त की जबकि दूर दराज के लोगों को इससे छूट दे दी गई।
डिप्टी आरएमओ ईश्वर चंद्र गुप्ता ने बताया कि हर क्रय केंद्र पर मशीन से सिलाई संभव नहीं है। सभी से वार्ता के बाद हल निकाल लिया गया है। जल्द उतार शुरू हो जाएगा। उधर सरकारी क्रय केंद्रों पर उतार न होने से किसान गेहूं लेकर मंडी पहुंच रहा है। यहां आढ़तों पर खरीद तो हो रही है लेकिन अच्छे गेहूं को बीज के नाम पर 1500 रुपये तक खरीदा जा रहा है।
वहीं मंडी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बीज के नाम पर गेहूं का अवैध रूप से स्टाक किया जा रहा है। गेहूं की बीज सीधे खेतों से उन्हें किसानों से खरीदा जाना चाहिए जिन्हें फाउंडेशन बीज दिया गया है, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। बाद में यही गेहूं बीज के नाम पर 25 सौ से तीन हजार रुपये के रेट से किसानों को दे दिया जाएगा।
गेहूं उतार में 1650 रुपये हो रही डाला वसूली
पूरनपुर। एसडब्ल्यूसी गोदाम में गेहूं उतार मेें 1650 रुपये प्रति ट्रक के हिसाब से डाला वसूली की जा रही है। इसमें पचास रुपये कांटा के नाम पर लिए जा रहे है।
खरीद केंद्रों और कमीशन से की गई गेहूं खरीद का उतार जसवंती स्थित एसडब्ल्यूसी गोदाम में शुरू कर दिया गया है। गोदाम में गेहूं उतार के नाम पर प्रति ट्रक पर 1650 रुपये डाला वसूली के लिए जा रहे है। सूत्रों के अनुसार इसमें से 100 रुपये परखी के, 50 रुपये कांटा के और 1500 रुपये बंदरबांट के लिए जा रहे है।
इसको लेकर गेहूं उतार कराने वालों में रोष है। एसडब्ल्यूसी के गोदाम इंचार्ज एचएस दुबे ने डाला वसूली से इंकार किया है। कहा कि कांटा और लेबर वाले कुछ ले रहे होंगे। डाला वसूली नहीं हो रही है। एफसीआई के मनोज ने बताया कि उनकी जिम्मेदारी उतार हो रहे गेहूं में गुणवत्ता जांचने की है।