जर्जर हालत में बरखेड़ा क्षेत्र का प्राथमिक विद्यालय। संवाद
पीलीभीत। नई शिक्षा नीति, बेहतर शैक्षिक माहौल और उन्हें आधुनिक बनाने के तमाम सरकारी दावों के बीच जिले के कई परिषदीय विद्यालयों की स्थिति बदहाल है। कहीं जर्जर भवनों की छतों से प्लास्टर झड़ रहा है तो कहीं दीवारों पर दरारें आ गई हैं। इस तरह की कमियों के बावजूद बच्चे सुनहरे भविष्य की आस में इन विद्यालयों में भविष्य संवार रहे हैं। इससे हर पल हादसे का खतरा मंडरा रहा है।
बेसिक शिक्षा विभाग करीब 210 विद्यालय भवनों को जर्जर घोषित कर चुका है। विभाग का दावा है कि इन भवनों में शिक्षण कार्य बंद करा दिया गया है। वहीं, इनमें से कुछ में अब भी पढ़ाई चल रही है तो दूसरी तरफ इन जर्जर भवनों की जगह नए भवन न बनने से बच्चों को खुले में बैठना पड़ रहा है। बरखेड़ा क्षेत्र का एक पीएम श्री विद्यालय इसका बड़ा उदाहरण है, जहां 175 बच्चों के लिए पर्याप्त सुरक्षित कक्ष उपलब्ध नहीं हैं। वर्ष 2017 से जर्जर बताए जा रहे कमरों का संकट अब भी बना हुआ है।
बीसलपुर क्षेत्र के एक निजी विद्यालय में मंगलवार को टिनशेड और दीवार गिरने से बच्चों के घायल होने की घटना ने पूरे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। इसके बाद डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने सभी एसडीएम और खंड शिक्षा अधिकारियों के स्तर पर समितियां गठित कर स्कूलों की जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को साफ कहा गया है कि कहीं भी जर्जर या असुरक्षित भवन में बच्चों को बैठाकर शिक्षण कार्य होता मिले तो तत्काल उसे बंद कराया जाए। संवाद
जर्जर हालत में बरखेड़ा क्षेत्र का प्राथमिक विद्यालय। संवाद
जर्जर हालत में बरखेड़ा क्षेत्र का प्राथमिक विद्यालय। संवाद