मंडी परिसर में बिक्री के लिए रखे तरबूज। संवाद
पीलीभीत। जिले में गर्मी के बीच भी तरबूज और खरबूज का बाजार फीका नजर आ रहा है। पिछले साल की तुलना में दोनों ही मौसमी फलों की आवक कम हुई है। दिल्ली मंडी में माल न लिए जाने से तरबूज का व्यापार घटा है। स्थानीय स्तर से तरबूज की कुछ खेप मंडी पहुंच रही है, लेकिन खरबूज के लिए व्यापारियों को पूरी तरह से बाहरी मंडियों पर निर्भर होना पड़ रहा है। आगरा से बड़े पैमाने पर मंगाया जा रहा है।
तराई क्षेत्र में होने वाली बेमौसम बारिश ने इस बार पालेज (फसल) को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे स्थानीय स्तर पर खरबूज की पैदावार नाममात्र रह गई है। तराई के खेतों से निकलने वाला तरबूज-खरबूज आसपास के जिलों की भी जरूरतें पूरी करता था, लेकिन इस बार पालेज बर्बाद होने से यहां का व्यापार कम हो गया है। स्थानीय मंडियों में तरबूज तो जैसे-तैसे पहुंच रहा है, पर खरबूज की खेप सीधे आगरा से मंगानी पड़ रही है।
व्यापारियों का कहना है कि आगरा से ज्यादा करीब बदायूं है, लेकिन वहां के खरबूज की गुणवत्ता अच्छी नहीं है। इस वजह से खरबूज आगरा से मंगाया जा रहा है। संवाद
मंडी परिसर में बिक्री के लिए रखे तरबूज। संवाद
मंडी परिसर में बिक्री के लिए रखे तरबूज। संवाद
मंडी परिसर में बिक्री के लिए रखे तरबूज। संवाद