शहरवासियों को अब रोस्टर के मुताबिक जलापूर्ति की जाएगी। नगरपालिका
प्रशासन ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी है। जलकल विभाग के मुताबिक सप्ताह भर
के भीतर रोस्टर लागू कर दिया जाएगा।
शहर की आबादी दो लाख का आंकड़ा पार
कर चुकी है, लेकिन पेयजल आपूर्ति के संसाधन तीन दशक पुराने ही है। शहर में
वर्ष 1955 में जलकल विभाग की स्थापना की गई थी। इसके बाद वर्ष 1980 में
चार ओवरहेड टैंक व 11 नलकूल स्थापित किए, लेकिन आबादी के साथ संसाधनों की
बढोत्तरी न होने से शहर की जलापूर्ति व्यवस्था गर्मी के दिनों में अकसर
बेपटरी ही रहती है।
इधर अब नगरपालिका प्रशासन ने पानी की बर्बादी रोकने और
शहरवासियों को जरुरत के मुताबिक जलापूर्ति की जा सके, इसके लिए रोस्टर
व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया है।
चार शिफ्टों में होगी जलापूर्ति
शहर
में अभी तक बिजली आने पर लगातार उपभाक्ताओं को जलापूर्ति की जा रही है,
लेकिन अब करीब दो दशक पुरानी व्यवस्था में बदलाव करते हुए चार शिफ्टों में
जलापूर्ति की जाएगी। रोस्टर के मुताबिक रोजाना सुबह पांच बजे से दस बजे
तक, दोपहर डेढ़ बजे से ढाई बजे तक, शाम पांच बजे से आठ बजे तक और रात दस
बजे से 11 बजे तक पानी की सप्लाई की जाएगी।
जल्द लागू होगी रोस्टर व्यवस्था
अभी
तक बिजली आने पर लगातार जलापूर्ति की जा रही है। पानी बर्बाद न हो और
सहूलियत से उपलब्ध हो सके, इसको लेकर रोस्टर व्यवस्था लागू की जा रही है।
जल्द ही इसे लागू कर दिया जाएगा।
-सोमप्रकाश, अवर अभियंता, जलकल विभाग
रोस्टर व्यवस्था समय की मांग
पानी
की बर्बादी रोकने को विश्व के हर देश में पहल हो रही है। यदि रोस्टर
व्यवस्था लागू होती है तो यह शहरवासियों के हित की ही बात है।
-देव शर्मा, व्यापारी
पहले जर्जर पाइप लाइनें हो दुरुस्त
पानी
को लेकर हर साल गर्मियों में दिक्कतें सामने आती हैं। रोस्टर व्यवस्था
कहां तक उचित है, यह तो आने वाला समय बताएगा, लेकिन उससे पहले जर्जर पाइप
लाइनें जरूर दुुरुस्त होनी चाहिए।
-साधना शर्मा, गृहणी
फैक्ट फाइल-
घरेलू उपभोक्ता- 12436
कामर्शियल उपभोक्ता- 286
आवश्यकता प्रति व्यक्ति- 127 लीटर प्रतिदिन
जलापूर्ति प्रति व्यक्ति- 122 लीटर प्रतिदिन